चंडीगढ़: सरकारी फ्लैट फर्जीवाड़ा मामले ने आवंटन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. चंडीगढ़ सरकारी फ्लैट फर्जीवाड़ा और चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड की जांच में सामने आया कि दस्तावेजों में एक व्यक्ति की भाभी को उसकी पत्नी दिखाकर सरकारी फ्लैट आवंटित करा लिया गया. शिकायत मिलने के बाद बोर्ड ने रिकॉर्ड खंगाले और प्राथमिक जांच में गड़बड़ी मिलने पर पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर विस्तृत जांच शुरू कर दी है.
यह मामला धनास स्थित सरकारी फ्लैट से जुड़ा है, जहां ललिता देवी ने दावा किया कि वह रामानंद की वास्तविक पत्नी हैं. उनका आरोप है कि उनकी बीमारी और गांव में रहने का फायदा उठाकर जेठानी रेटा देवी को सरकारी रिकॉर्ड में रामानंद की पत्नी दर्शा दिया गया. इसी कथित फर्जी दस्तावेज के आधार पर फ्लैट का आवंटन कराया गया और वर्षों तक रिकॉर्ड बिना आपत्ति चलता रहा.
ललिता देवी के अनुसार फ्लैट आवंटन की प्रक्रिया के दौरान वह अपने पैतृक गांव में इलाज करा रही थीं. इसी बीच उनकी जानकारी के बिना आवेदन पत्र और रिकॉर्ड में रेटा देवी का नाम जोड़ दिया गया. उनका कहना है कि पूरे परिवार की पहचान बदलकर पात्रता तैयार की गई, जिससे सरकारी योजना का लाभ गलत तरीके से हासिल किया गया.
शिकायत सामने आने के बाद मामला चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड तक पहुंचा. बोर्ड ने रिकॉर्ड की समीक्षा शुरू की और आवंटन से जुड़े दस्तावेजों का मिलान कराया, जहां कई तथ्य संदिग्ध पाए गए.
बोर्ड के रिकॉर्ड के अनुसार पांच सितंबर 2014 को चंडीगढ़ स्मॉल फ्लैट्स योजना के तहत यह फ्लैट रामानंद और रेटा देवी के संयुक्त नाम पर 20 वर्ष के लाइसेंस पर आवंटित हुआ था. शिकायत मिलने के बाद एक मई 2025 को प्रवर्तन शाखा ने फ्लैट का निरीक्षण किया. निरीक्षण के दौरान रेटा देवी परिवार के साथ फ्लैट में रहती मिलीं. इसके बाद बोर्ड ने आवंटी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा और पूरी फाइल दोबारा जांच के लिए खोली.
21 जुलाई की सुनवाई में रामानंद और ललिता देवी दोनों बोर्ड के सामने पेश हुए. रिकॉर्ड के अनुसार रामानंद ने बताया कि आवेदन पत्र में रेटा देवी का नाम दर्ज था और उसी आधार पर लाइसेंस बनवाया गया. उसने यह भी माना कि फ्लैट संबंधी प्रक्रिया के दौरान रेटा देवी के साथ फोटो खिंचवाई गई थी. इसी बयान और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड ने पूरा मामला सेक्टर 3 थाना पुलिस को भेज दिया, जिसके बाद प्राथमिकी दर्ज कर ली गई.
पुलिस अब यह पता लगाएगी कि कथित फर्जीवाड़ा कैसे हुआ और इसमें किसकी भूमिका रही. जांच के दायरे में कई अहम रिकॉर्ड शामिल हैं.
अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी. फिलहाल पूरे मामले में दस्तावेजी साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं और आवंटन प्रक्रिया की हर कड़ी की जांच जारी है.