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पंजाब में क्यों बढ़ी सरकार-ए-खालसा की चर्चा? जानें चुनाव से पहले क्या है बीजेपी की नई रणनीति

पंजाब भाजपा के नए अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों द्वारा सरकार-ए-खालसा का उल्लेख किए जाने के बाद यह एकबार फिर से चर्चा में है. चलिए जानते हैं पंजाब के लिए पार्टी का क्या प्लान है.

Km Jaya
Edited By: Km Jaya
पंजाब में क्यों बढ़ी सरकार-ए-खालसा की चर्चा? जानें चुनाव से पहले क्या है बीजेपी की नई रणनीति
Courtesy: @KewalDhillonPB X Account and Pinterest

चंडीगढ़: पंजाब में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले भारतीय जनता पार्टी अपनी राजनीतिक रणनीति को नए सिरे से आकार देती नजर आ रही है. हाल ही में पार्टी ने केवल सिंह ढिल्लों को पंजाब भाजपा का नया अध्यक्ष नियुक्त किया है. उनकी नियुक्ति को सिख समुदाय, खासकर जाट सिख मतदाताओं के बीच पार्टी की पहुंच मजबूत करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है. पद संभालने के बाद ढिल्लों ने बार-बार सरकार-ए-खालसा का जिक्र किया, जिससे पंजाब की राजनीति में इस ऐतिहासिक अवधारणा की चर्चा फिर तेज हो गई है.

सरकार-ए-खालसा का संबंध महाराजा रणजीत सिंह के शासन मॉडल से माना जाता है. इतिहासकारों के अनुसार इसका अर्थ खालसा की सरकार या जनता के हित में चलने वाला प्रशासन है. महाराजा रणजीत सिंह ने विशाल सिख साम्राज्य स्थापित किया था लेकिन उन्होंने स्वयं को सत्ता का सर्वोच्च प्रतीक बनाने के बजाय खालसा परंपरा को महत्व दिया. उनका शासन तिब्बत से सिंध तक और खैबर दर्रे से सतलुज तक फैला हुआ था.

क्यों खास है महाराजा रणजीत सिंह का शासन काल?

इतिहास में महाराजा रणजीत सिंह के शासन को सिख साम्राज्य का स्वर्णिम काल माना जाता है. उनकी पहचान केवल एक शक्तिशाली शासक के रूप में नहीं बल्कि सभी धर्मों और समुदायों के प्रति समान व्यवहार करने वाले नेता के रूप में भी रही है. उन्होंने हरमंदिर साहिब के साथ-साथ हिंदू मंदिरों और मुस्लिम धार्मिक स्थलों को भी संरक्षण और दान दिया था.

राजनीतिक विश्लेषकों का क्या है मानना?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा सरकार-ए-खालसा और महाराजा रणजीत सिंह की विरासत को सामने रखकर पंजाब की साझा सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने का संदेश देना चाहती है. 2020-21 के किसान आंदोलन के दौरान भाजपा को पंजाब में काफी राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ा था. इसके बाद पार्टी लगातार ऐसे मुद्दों और प्रतीकों की तलाश में है जो उसे सिख समुदाय और ग्रामीण मतदाताओं के करीब ला सकें.

भाजपा का क्या है मानना?

भाजपा का मानना है कि सरकार-ए-खालसा का मॉडल केवल सिख इतिहास तक सीमित नहीं है बल्कि यह समानता, न्याय और सभी समुदायों के सम्मान की भावना का प्रतीक है. इसी कारण पार्टी इसे पंजाबियत और सामाजिक समरसता के संदेश के रूप में प्रस्तुत कर रही है. पंजाब भाजपा कार्यालय में महाराजा रणजीत सिंह की बड़ी तस्वीर लगाना भी इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है.

दूसरी ओर पंजाब की राजनीति में नए समीकरण भी बन रहे हैं. दाखा से विधायक मनप्रीत सिंह अयाली के अकाली दल वारिस पंजाब दे में शामिल होने की चर्चा है. यह पार्टी अमृतपाल सिंह से जुड़ी मानी जाती है. ऐसे घटनाक्रमों के बीच भाजपा अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने के लिए इतिहास, सांस्कृतिक विरासत और विकास के मुद्दों को एक साथ लेकर आगे बढ़ने की कोशिश कर रही है.