मराठा आरक्षण की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे कार्यकर्ता मनोज जरांगे पाटिल ने आखिरकार 20 दिनों के बाद अपना अनशन समाप्त कर दिया है. हालांकि, उन्होंने महाराष्ट्र सरकार को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि अगले तीन महीनों के भीतर मराठा आरक्षण को लेकर उनकी मांगों पर ठोस और सकारात्मक विचार नहीं किया गया, तो वह अपने विरोध प्रदर्शन का रुख राज्य की राजधानी मुंबई की ओर करेंगे.
इस अनशन को खत्म कराने में महाराष्ट्र सरकार की सीक्रेट डिप्लोमेसी की अहम भूमिका रही. पेरिस में इंटरनेशनल स्पेस कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लेने गए महाराष्ट्र के उद्योग मंत्री उदय सामंत ने वहां से ही मध्यस्थता की. उन्होंने पेरिस से सीधे समन्वय बैठाते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और जरांगे पाटिल के सहयोगियों के बीच बातचीत का रास्ता साफ किया.
मामले को सुलझाने के लिए सरकार और आंदोलनकारियों के बीच लगभग सात दौर की गंभीर बातचीत हुई. उद्योग मंत्री उदय सामंत ने पेरिस से एक विशेष कॉन्फ्रेंस कॉल आयोजित की, जिसमें मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल और बीजेपी नेता प्रसाद लाड शामिल हुए. इस बातचीत में आंदोलन को मुंबई आने से रोकने और स्थिति को शांतिपूर्ण ढंग से हल करने की रणनीति पर चर्चा की गई.
राज्य सरकार ने जरांगे पाटिल के करीबी सहयोगियों से सीधा संपर्क साधकर उनकी लंबित मांगों पर सकारात्मक फैसले लेने का भरोसा दिया. सरकार का मुख्य उद्देश्य संवाद का जरिया खुला रखकर इस आंदोलन का सौहार्दपूर्ण समाधान निकालना था. सरकार के इस रुख और आश्वासन के बाद जरांगे पाटिल ने अपना अनशन वापस ले लिया.