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'हिंदी से दूरी नहीं बनाई जा सकती', सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार को दी हिदायत

सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु में जवाहर नवोदय विद्यालय खोलने के लिए जमीन चिह्नित करने का निर्देश दिया है. कोर्ट ने कहा कि राज्य में हिंदी न पढ़ाने की जिद सही नहीं है.

Sagar
Edited By: Sagar Bhardwaj
'हिंदी से दूरी नहीं बनाई जा सकती', सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार को दी हिदायत
Courtesy: X

सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार को निर्देश दिया है कि वह जवाहर नवोदय विद्यालय स्थापित करने के लिए हर जिले में जमीन की पहचान करने के 15 दिसंबर, 2025 के आदेश का पालन करे. सुनवाई के दौरान जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने राज्य की 'तीन-भाषा नीति' के विरोध पर सवाल उठाए. पीठ ने सख्त लहजे में टिप्पणी करते हुए कहा कि राज्य को अपनी सोच बदलनी होगी और ऐसा नहीं हो सकता कि तमिलनाडु की धरती पर हिंदी न पढ़ाई जाए.

सहकारी संघवाद और संवाद पर जोर

न्यायालय ने सहकारी संघवाद की आवश्यकता रेखांकित करते हुए कहा कि चेन्नई के नागरिकों को दिल्ली से दूरी नहीं बनानी चाहिए. बेंच ने स्पष्ट किया कि केंद्र से वित्तीय मदद प्राप्त संस्थानों को राज्य अपनी शिक्षा व्यवस्था के लिए खतरा न समझे. नवोदय विद्यालय खुलने से राज्य का शैक्षणिक स्तर कम नहीं होगा. अदालत ने राज्य और केंद्र सरकार को आपस में बातचीत कर भाषा से जुड़े मतभेदों को सुलझाने के लिए तीन महीने का अतिरिक्त समय प्रदान किया है.

तमिलनाडु सरकार का पक्ष और तर्क

तमिलनाडु सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता जयदीप गुप्ता ने तर्क दिया कि शिक्षा 'समवर्ती सूची' का विषय है और राज्य को अपनी शिक्षा नीति बनाने का संवैधानिक अधिकार है. उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार को स्कूल खोलने या हिंदी से परहेज नहीं है, बल्कि नवोदय योजना की उस भाषा नीति पर आपत्ति है जो तमिल भाषा को पीछे धकेलती है. इसके अतिरिक्त राज्य ने केंद्र द्वारा शिक्षा के मद में बकाया 5,000 करोड़ रुपये जारी न करने के कारण वित्तीय बोझ का मुद्दा भी उठाया.

केंद्र का रुख और कोर्ट का अंतिम आदेश

केंद्र की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार का मुख्य दायित्व केवल भूमि उपलब्ध कराना है, जबकि निर्माण और संचालन का समस्त वित्तीय खर्च केंद्र सरकार वहन करेगी. पीठ ने राज्य सरकार द्वारा आदेश वापस लेने की मांग को खारिज करते हुए तीन महीने के भीतर भूमि चिह्नित करने का निर्देश दिया. इस महत्वपूर्ण मामले की अगली सुनवाई 14 दिसंबर को निर्धारित की गई है.