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मछुआरों की परेशानी से निकली आस्था की राह, ऐसे शुरू हुआ मुंबई के लालबागचा राजा का सफर

मुंबई के प्रसिद्ध लालबागचा राजा की 2026 की पहली झलक सामने आ गई है. शुक्रवार को भक्तों ने बप्पा के भव्य स्वरूप के दर्शन किए. गणेश चतुर्थी से पहले लालबाग में उत्साह चरम पर है.

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Meenu Singh

मुंबई में गणेश भक्तों के इंतजार का अब अंत होने वाला क्योंकि साल भर का इंतजार कराने के बाद बप्पा सोमवार को भक्तों के घर पधार रहे हैं. पूरा मुंबई अब बप्पा के स्वागत के लिए तैयार है. इतना ही नहीं मुंबई के प्रसिद्ध लालबागचा राजा की पहली झलक भी सामने आ चुकी है. मुंबई के लालबाग इलाके में गणेश उत्सव की तैयारियां अब अंतिम दौर में पहुंच गई हैं. शुक्रवार शाम लालबागचा राजा की पहली झलक सामने आते ही भक्तों का इंतजार खत्म हो गया.

भव्य सिंहासन पर विराजमान बप्पा का शांत स्वरूप लोगों को आकर्षित कर रहा है. लालबागचा राजा को मनोकामना पूरी करने वाले गणपति के रूप में विशेष मान्यता हासिल है. इस बार गणेश चतुर्थी 14 सितंबर से शुरू होगी और 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी पर प्रतिमा का विसर्जन किया जाएगा. लेकिन इन सबसे पहले सवाल यह है कि आखिरी लालबागचा राजा की  स्थापना की शुरुआत कब और कैसे हुई थी. 

1932 के बाद बदली लालबाग की तस्वीर

लालबागचा राजा की कहानी पुराने गिरणगांव से जुड़ी है. 1932 में पेरू चॉल के पास लगने वाला बाजार बंद हुआ तो दुकानदारों और मछुआरों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया. स्थायी बाजार के लिए स्थानीय लोगों ने प्रयास किए और गणपति से मन्नत मांगी. बाद में राजाबाई तैयब अली ने बाजार के लिए जमीन देने की सहमति जताई. बाजार बनने के बाद मनौती पूरी होने की खुशी में गणेश उत्सव शुरू किया गया.


1934 में बना सार्वजनिक गणेश मंडल

लालबागचा राजा सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडल की स्थापना 12 सितंबर 1934 को हुई थी. यह परंपरा पुतलाबाई चॉल से जुड़ी रही और समय के साथ उत्सव का विस्तार होता गया. इस साल मंडल 93वां गणेश उत्सव मना रहा है. प्रतिमा निर्माण और देखभाल की जिम्मेदारी कांबली परिवार कई पीढ़ियों से संभालता आ रहा है. मंडल की सजावट में धार्मिक भावनाओं के साथ सामाजिक संदेश भी देखने को मिलते हैं.

मन्नतों के लिए देशभर से आते हैं भक्त

लालबागचा राजा को नवसाला पावणारा गणपति कहा जाता है, यानी ऐसा गणपति जो भक्तों की मनोकामना पूरी करने वाले माने जाते हैं. इसी विश्वास के कारण यहां हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं. मुंबई के अलग-अलग हिस्सों के अलावा दूसरे शहरों से भी लोग दर्शन के लिए आते हैं. गणेश उत्सव स्थानीय संस्कृति, कारोबार और रोजगार से भी जुड़ा है. पंडाल के आसपास भजन, आरती और सजावट का माहौल रहता है.

पहली झलक ने बढ़ाया उत्सव का रंग

2026 में सामने आई पहली झलक में लालबागचा राजा भव्य सिंहासन पर विराजमान नजर आए. शांत भाव वाले बप्पा के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में भक्त लालबाग पहुंचे. लोगों ने तस्वीरें लीं और सोशल मीडिया पर भी झलक साझा की. गणेश चतुर्थी नजदीक आने के साथ मुंबई में उत्सव का रंग गहराने लगा है. लालबाग की यह परंपरा अब सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि शहर की सामूहिक आस्था और एकता की पहचान बन चुकी है.