Twisha Sharma Death Case: नोएडा की रहने वाली 33 साल की ट्विशा शर्मा की मौत के मामले में शुक्रवार को एक बड़ा ड्रामा देखने को मिला. ट्विशा के पति समर्थ सिंह ने जबलपुर कोर्ट में सरेंडर कर दिया है जिसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया है. गौरतलब है कि बीती 12 मई को भोपाल में समर्थ के घर पर ट्विशा का शव मिला था जिसके बाद से ही इस मामले ने काफी तूल पकड़ लिया है.
ट्विशा के परिवार वालों का आरोप है कि समर्थ और उसके घर वाले दहेज के लिए ट्विशा को प्रताड़ित करते थे जिससे तंग आकर उसने यह आत्मघाती कदम उठाया. वहीं दूसरी तरफ सिंह परिवार का कहना है कि ट्विशा को ड्रग्स की लत थी. हालांकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की वजह खुदकुशी बताई गई है लेकिन लड़की के घरवालों ने इसे मानने से इनकार कर दिया है और हत्या की आशंका जताई है.
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#WATCH | Jabalpur, Madhya Pradesh | Twisha Sharma death case: Twisha's husband and accused, Samarth Singh, arrives at the Jabalpur court. He was absconding in the case.
— ANI (@ANI) May 22, 2026
According to his advocate, Saurabh Sunder, Samarth Singh is here to surrender, and they are moving an… https://t.co/XN54mYLfJO pic.twitter.com/zRLCm9xFKz
घटना के बाद से समर्थ सिंह पिछले 10 दिनों से गायब था. शुक्रवार को वह अचानक सरेंडर करने जबलपुर कोर्ट पहुंचा. वहां काफी अफरा-तफरी का माहौल बन गया क्योंकि पुलिस बाहर गिरफ्तारी के लिए खड़ी थी और समर्थ अंदर अलग-अलग कोर्ट रूम में घूम रहा था. इस दौरान पत्रकारों ने भी उसे घेरकर कई सवाल पूछे. आखिरकार पुलिस ने उसे अपनी कस्टडी में ले लिया.
कोर्ट में सुनवाई के दौरान समर्थ के वकील ने बताया कि उनका मुवक्किल सरेंडर करने को तैयार है और अपनी अग्रिम जमानत की अर्जी वापस ले रहा है. हाई कोर्ट ने उसे ट्रायल कोर्ट या भोपाल के कटारा पुलिस स्टेशन में सरेंडर करने की इजाजत दे दी और अगली सुनवाई सोमवार के लिए तय की.
इसी बीच ट्विशा के पिता की मांग पर कोर्ट ने दोबारा पोस्टमार्टम कराने की मंजूरी दे दी है. समर्थ के वकीलों ने इसका विरोध करते हुए कहा कि पहला पोस्टमार्टम एम्स के डॉक्टरों ने किया था, इसलिए दोबारा जांच की कोई जरूरत नहीं है.
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि डॉक्टरों ने अपना काम सही से किया है लेकिन अगर परिवार को शक है तो दूसरी राय ली जा सकती है. कोर्ट ने शव को सुरक्षित रखने पर भी चर्चा की क्योंकि भोपाल में लंबे समय तक बॉडी रखने की वैसी सुविधा नहीं थी. वहीं मध्य प्रदेश सरकार ने निष्पक्ष जांच के लिए यह केस सीबीआई को सौंपने की सिफारिश की है.