पूर्व जज गिरिबाला सिंह पर CBI ने लगाए गंभीर आरोप, कहा- ट्विशा का करेक्टर खराब करने में कोई कसर नहीं छोड़ी
ट्विशा शर्मा मौत मामले में CBI ने पूर्व जज गिरिबाला सिंह पर दहेज प्रताड़ना, जबरन गर्भपात और सबूत मिटाने के गंभीर आरोप लगाए. मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत रद्द कर दी.
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने ट्विशा मौत मामले में पूर्व जज गिरिबाला सिंह की जमानत रद्द करने के लिए 17 पन्नों का आदेश दिया है. दरअसल मामले की जांच कर रही सीबीआई ने कोर्ट को बताया था कि निष्पक्ष जांच के लिए पूर्व जज गिरिबाला सिंह से हिरासत में पूछताछ किया जाना जरूरी है. सीबीआई ने आरोप लगाया है कि गिरिबाला सिंह ने 33 साल की एक्टर-मॉडल ट्विशा सिंह के चरित्र को बदनाम करने में कोई कसर नहीं छोड़ी. इतना ही नहीं सीबीआई ने अदालत में दहेज उत्पीड़न, जबरन प्रेगनेंसी खत्म करने और सबूतों से छेड़छाड़ करने का आरोप भी गिरिबाला सिंह पर लगाया है.
सीबीआई ने शारीरिक उत्पीड़न के भी आरोप लगाए
सीबीआई ने अदालत में यह भी कहा कि ट्विशा शर्मा की कलाई और कोहनी पर चोट के निशान मिले थे. ट्विशा के ससुराल वालों से जब चोटों के निशान पर सवाल पूछे गए तो वे कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए. ट्विशा शर्मा के ससुराल वाले पूछताछ में इस बात का जवाब नहीं दे सके कि ट्विशा को ये चोटें कैसें लगी थीं. एजेंसी ने गवाहों के बयानों का हवाला देते हुए दावा किया है कि शादी के दौरान दिए गए दहेज से वे खुश नहीं थे, और कई बार दहेज मांगा गया.
सीबीआई ने जबरन अबॉर्शन का दावा किया
जांच एजेंसी ने व्हाट्सएप चैट से इस बात का खुलासा होने का दावा किया है कि ट्विशा के गर्भवर्ती होने पर पति समर्थ सिंह ने लांछन लगाया. कहा गया कि गर्भ में पल रहा बच्चा किसी और का है. करेक्टर पर पर सवाल उठाकर ट्विशा को अबॉर्शन कराने के लिए मजबूर किया गया. आरोप लगाया गया है कि समर्थ सिंह के साथ गिरिबाला सिंह ट्विशा शर्मा के करेक्टर को लेकर अक्सर सवाल उठाती थीं, उन्हें भी ट्विशा के करेक्टर पर शक था.
सबूतों से छेड़छाड करने का भी आरोप लगाया
सीबीआई ने गिरिबाला सिंह पर सबूतों से छेड़छाड़ करने और एक चुनिंदा वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल करने का भी आरोप लगाया है. एजेंसी ने आरोप लगाया है कि ऐसा करके गिरिबाला सिंह ने मामले से जुड़ी कहानी को प्रभावित करने का प्रयास किया. सीबीआई ने अपनी दलीलें देते हुए कोर्ट से कहा कि इतने गंभीर आरोपों की जांच के लिए कस्टोडियल पूछताछ किया जाना जरूरी है.
हाई कोर्ट ने रद्द कर दिया अग्रिम जमानत वाला आदेश
सीबीआई के दलीलें सुनने के बाद मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत रद्द कर दी. अपने 17 पन्नों के ऑर्डर में हाई कोर्ट के वेकेशन जज देवनारायण मिश्रा ने 15 मई को दिए गए एडिशनल सेशंस जज के उस ऑर्डर को रद्द कर दिया जिसमें गिरिबाला सिंह को अग्रिम जमानत दी गई थी. ट्विशा के परिवार की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने कहा- ट्विशा मामले में हाई कोर्ट से न्याय हुआ है. 36 साल तक न्यायिक सेवा में रहीं गिरिबाला सिंह खुद सीबीआई के समक्ष सरेंडर कर देना चाहिए.