ट्विशा शर्मा मौत मामले में नया मोड़, भोपाल और दिल्ली एम्स की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में चोटों को लेकर अलग राय

ट्विशा शर्मा की 12 मई 2026 को भोपाल स्थित ससुराल में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई थी. अब एम्स भोपाल और एम्स दिल्ली की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में चोटों को लेकर सामने आए अंतर ने मामले को फिर चर्चा में ला दिया है.

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Shanu Sharma

नोएडा की अभिनेत्री और मॉडल ट्विशा शर्मा की मौत की गुत्थी अभी भी पूरी तरह से नहीं सुलझी है. पोस्टमार्टम रिपोर्टों के बीच सामने आए अंतर ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. ट्विशा का शव 12 मई 2026 को भोपाल स्थित उनकी ससुराल में फंदे से लटका मिला था. 

मामले की जांच के दौरान एम्स भोपाल और एम्स दिल्ली में पोस्टमार्टम जांच कराई गई. दोनों मेडिकल बोर्ड ने मौत का कारण फांसी से होने वाला दम घुटना बताया है. हालांकि, शरीर पर मिली चोटों को लेकर दोनों रिपोर्ट में अलग-अलग राय सामने आई है.

एम्स भोपाल ने सात चोटों का किया था जिक्र

पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता अंकुर पाण्डेय के मुताबिक, शुरुआती पोस्टमार्टम रिपोर्ट में ट्विशा के शरीर पर सात ऐसी चोटें दर्ज की गई थीं, जो मौत से पहले लगी बताई गई थीं. इसके बाद 18 मई 2026 को एम्स भोपाल ने एसीपी मिसरोद डिवीजन को पत्र भेजकर इन चोटों से जुड़े सवालों पर अपनी राय दी. मेडिकल बोर्ड ने गर्दन पर मिले दो छोटे लाल घर्षण के निशानों को फांसी के दौरान रस्सी या फंदे के खिंचाव और घर्षण से जुड़ा बताया. बोर्ड के अनुसार ये निशान नाखून या उंगलियों के दबाव से बने हुए नहीं थे.


वहीं, एम्स दिल्ली के मेडिकल बोर्ड ने दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शरीर पर मौजूद चोटों को हादसे के दौरान शरीर को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने से होने वाली चोटों के अनुरूप माना. बोर्ड ने यह भी कहा कि शरीर पर हमला, हाथापाई या संघर्ष का संकेत देने वाली चोटें नहीं मिलीं. इस तरह दोनों मेडिकल बोर्ड मौत के कारण पर तो एकमत नजर आते हैं, लेकिन चोटों की प्रकृति और उनके लगने के समय को लेकर दोनों की राय अलग है.

सीबीआई के निष्कर्ष पर भी सवाल

उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार, सीबीआई के अंतिम निष्कर्ष में एम्स दिल्ली के मेडिकल बोर्ड की राय को प्रमुख आधार बनाया गया. इसके बाद यह सवाल उठ रहा है कि जब एम्स भोपाल ने कुछ चोटों को मौत से पहले लगी चोट बताया था, तो दिल्ली एम्स की अलग राय को अधिक महत्व क्यों दिया गया. एक अन्य अहम सवाल यह भी है कि एम्स दिल्ली के मेडिकल बोर्ड ने शव की दोबारा जांच की थी या उसने तस्वीरों और पहले से मौजूद पोस्टमार्टम दस्तावेजों के आधार पर अपनी राय दी थी