ग्वालियर: मध्य प्रदेश के ग्वालियर से एक बेहद दर्दनाक मामला सामने आया है, जिसने स्वास्थ्य व्यवस्था और लोगों की जागरूकता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. 36 वर्षीय राजू कुशवाहा की कथित तौर पर मौत इसलिए हो गई क्योंकि कुत्ते के काटने के बाद उन्हें रेबीज वैक्सीन की जगह केवल टिटनेस का इंजेक्शन लगा दिया गया.
रिपोर्ट्स के मुताबिक राजू को कुछ सप्ताह पहले कुत्ते ने काट लिया था. परिवार का आरोप है कि इलाज के दौरान उन्हें रेबीज से बचाने वाली जरूरी वैक्सीन नहीं दी गई. इसके बजाय केवल टिटनेस का इंजेक्शन लगाया गया. शुरुआत में मामला सामान्य लगा लेकिन कुछ हफ्तों बाद उनकी तबीयत तेजी से बिगड़ने लगी.
राजू में रेबीज के गंभीर लक्षण दिखाई देने लगे. उन्हें पानी से डर लगने लगा, जिसे हाइड्रोफोबिया कहा जाता है. इसके अलावा उनकी मानसिक स्थिति भी खराब होने लगी और न्यूरोलॉजिकल समस्याएं बढ़ती गईं. हालत गंभीर होने पर परिवार ने उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई.
बताया जा रहा है कि पिछले तीन से चार महीनों में ग्वालियर में रेबीज से मौत का यह सातवां मामला है. इससे साफ है कि यह सिर्फ एक घटना नहीं बल्कि बड़ा सार्वजनिक स्वास्थ्य मुद्दा बनता जा रहा है.
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार रेबीज एक वायरल बीमारी है जो केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करती है. यह संक्रमित जानवरों की लार से फैलती है. कुत्ते, बंदर और अन्य जानवरों के काटने, खरोंचने या खुले घाव के संपर्क में आने से यह संक्रमण हो सकता है.
डॉक्टरों के अनुसार कुत्ते के काटने के बाद सही इलाज पोस्ट एक्सपोजर प्रोफिलैक्सिस होता है. इसमें घाव को कम से कम 15 मिनट तक साबुन और बहते पानी से धोना जरूरी है. इसके बाद डॉक्टर की सलाह के अनुसार रेबीज वैक्सीन की पूरी डोज लेनी चाहिए. गंभीर घाव होने पर रेबीज इम्यूनोग्लोब्युलिन भी दिया जाता है.
विशेषज्ञों ने साफ कहा है कि टिटनेस इंजेक्शन रेबीज से बचाव नहीं करता. टिटनेस बैक्टीरिया से होने वाली बीमारी है जबकि रेबीज वायरस से होता है. दोनों के इलाज अलग हैं. स्वास्थ्य विशेषज्ञों का लोगों से कहना है कि किसी भी जानवर के काटने या खरोंचने पर तुरंत सही इलाज कराएं और रेबीज वैक्सीन लेने में देरी न करें.