'वेद न मानने वालों के बच्चे बन सकते हैं जावेद और नावेद', पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने छतरपुर में गुरुकुल खोलने का किया ऐलान

बागेश्वर धाम के महंत पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने छतरपुर में गुरुकुल खोलने की घोषणा की. उन्होंने कहा कि वेद न मानने वालों के बच्चे भविष्य में ‘जावेद’ और ‘नावेद’ बन सकते हैं.

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Kuldeep Sharma

छतरपुर: मध्य प्रदेश के छतरपुर स्थित बागेश्वर धाम के महंत पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने हाल ही में हिंदुत्व और वेदों के महत्व को लेकर बड़ा बयान दिया. शास्त्री ने घोषणा की कि उनके धाम में गुरुकुल स्थापित किया जाएगा, जहां वेदों और शास्त्रों की शिक्षा दी जाएगी. उन्होंने चेतावनी दी कि वेदों को न मानने वालों के बच्चे भविष्य में ‘जावेद’ और ‘नावेद’ जैसे नामों के साथ पैदा हो सकते हैं. शास्त्री ने शिक्षा के स्थायी महत्व पर जोर दिया.

गुरुकुल खोलने की घोषणा

धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने बताया कि बागेश्वर धाम में वेदों की परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए गुरुकुल स्थापित किया जाएगा. इस गुरुकुल में बच्चों को वेदों का ज्ञान, संस्कृत भाषा और धर्मशास्त्र पढ़ाया जाएगा. शास्त्री का मानना है कि शिक्षा जीवन भर टिकती है, जबकि भौतिक वस्तुएं अस्थायी होती हैं. उन्होंने कहा कि गुरुकुल का उद्देश्य सनातनी संस्कृति और वेदों के मूल्य को संरक्षित करना है.

चेतावनी और भविष्य की चिंता

महंत धीरेंद्र ने कहा कि वेदों का पालन न करने वाले लोगों के बच्चों का भविष्य अनिश्चित होगा. उनका बयान था कि ऐसे बच्चों के नाम ‘जावेद’ और ‘नावेद’ रखे जा सकते हैं. शास्त्री का कहना है कि यह चेतावनी केवल शिक्षा और धर्म के महत्व को समझाने के लिए दी गई है. उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे अपने बच्चों को संस्कार और वेदों की शिक्षा दें.

वेद और शिक्षा का महत्व

धीरेंद्र शास्त्री ने कहा, 'भोजन एक दिन तक टिकता है, पानी एक घंटे तक, लेकिन विद्या जीवन भर टिकती है.' उन्होंने जोर देकर कहा कि ज्ञान और शिक्षा ही जीवन को स्थायी रूप से सशक्त बनाती हैं. गुरुकुल में पढ़ाई का मुख्य उद्देश्य बच्चों में संस्कार, ज्ञान और नैतिक मूल्यों का विकास करना होगा.

देशभर में गुरुकुल का सपना

शास्त्री ने बताया कि उनका लक्ष्य केवल छतरपुर तक सीमित नहीं है. वे चाहते हैं कि देशभर में ऐसे गुरुकुल स्थापित हों, जहां सनातनी बच्चों को वेद और शास्त्रों की शिक्षा दी जाए. उन्होंने कहा कि इस प्रयास से आने वाली पीढ़ी धर्म, संस्कृति और वेदों की परंपरा से जुड़ी रहेगी.

जनता और मीडिया से संवाद

धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने राजस्थान के जयपुर में मीडिया से बातचीत में बताया कि गुरुकुल का उद्देश्य सिर्फ शिक्षा देना नहीं है, बल्कि बच्चों में संस्कार और नैतिक मूल्यों की समझ बढ़ाना है. उन्होंने लोगों से अनुरोध किया कि वे इस पहल का समर्थन करें और अपने बच्चों को इस शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करें.