मध्य प्रदेश का बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व देश विदेश के वन्यजीव प्रेमियों की पसंदीदा जगहों में शामिल है. हर साल मानसून शुरू होते ही यहां पर्यटन व्यवस्था में बदलाव किया जाता है. इस बार भी 1 जुलाई से कोर जोन की सफारी तीन महीने के लिए बंद की जा रही है. इस दौरान पर्यटक कोर क्षेत्र में प्रवेश नहीं कर सकेंगे. हालांकि बफर जोन में सफारी पहले की तरह जारी रहेगी. यहां आने वाले सैलानी मानसून के प्राकृतिक सौंदर्य के साथ वन्यजीवों का भी आनंद ले सकेंगे.
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व प्रशासन ने जानकारी दी है कि 1 जुलाई से 30 सितंबर तक सभी कोर पर्यटन क्षेत्र पूरी तरह बंद रहेंगे. इस अवधि में किसी भी पर्यटक को कोर जोन में सफारी की अनुमति नहीं मिलेगी. हर वर्ष मानसून के दौरान यही व्यवस्था लागू की जाती है ताकि जंगल का प्राकृतिक संतुलन बना रहे और वन्यजीवों को शांत वातावरण मिल सके.
टाइगर रिजर्व के अधिकारियों के अनुसार मानसून का समय बाघ सहित कई वन्यजीवों के प्रजनन का महत्वपूर्ण मौसम होता है. इस दौरान मानव गतिविधियों को सीमित रखना जरूरी माना जाता है. साथ ही लगातार बारिश से जंगल के कई रास्ते जलमग्न हो जाते हैं, जिससे कोर क्षेत्र में सफारी कराना सुरक्षित और व्यावहारिक नहीं रहता.
कोर क्षेत्र बंद रहने के बावजूद बफर जोन में पर्यटन गतिविधियां जारी रहेंगी. पर्यटक यहां सफारी का आनंद ले सकेंगे और आसपास स्थित रिसॉर्ट्स तथा होटलों में ठहरकर मानसून का अनुभव ले सकते हैं. बफर क्षेत्र में नियमित रूप से सफारी संचालित होगी, जिससे पर्यटन गतिविधियों पर पूरी तरह विराम नहीं लगेगा.
बांधवगढ़ में बाघों की संख्या लगातार बढ़ी है. इसका असर बफर क्षेत्र में भी दिखाई देता है. कई बाघ अब इन इलाकों में अपना स्थायी क्षेत्र बना चुके हैं. यही वजह है कि मानसून के दौरान भी बफर सफारी में टाइगर दिखने की संभावना बनी रहती है. यह पर्यटकों के लिए आकर्षण का प्रमुख कारण है.
बारिश के मौसम में बांधवगढ़ की हरियाली और प्राकृतिक सुंदरता अपने चरम पर होती है. शांत वातावरण, घने जंगल और ठंडी फिजा पर्यटकों को अलग अनुभव देती है. यदि आप इस मौसम में यहां आने की योजना बना रहे हैं, तो कोर सफारी की जगह बफर जोन का विकल्प चुन सकते हैं. इससे जंगल की खूबसूरती और वन्यजीवन दोनों का आनंद लिया जा सकता है.