'1 लाख रुपए महीने की नौकरी छोड़ना मेरे जीवन का सबसे सही फैसला था', बेंगलुरु के AI फाउंडर ने बताया
बेंगलुरु के एआई उद्यमी अर्जुन जैन ने 2007 में याहू की अच्छी नौकरी छोड़ने को जीवन का सबसे सही फैसला बताया. संघर्ष और असफलताओं के बाद यही निर्णय उन्हें वैश्विक एआई क्षेत्र तक ले गया.
बेंगलुरु के एआई उद्यमी अर्जुन जैन इन दिनों अपने एक पुराने फैसले को लेकर चर्चा में हैं. उन्होंने 2007 में याहू की उच्च वेतन वाली नौकरी छोड़ दी थी, जिसे आज वह अपने जीवन का सबसे महत्वपूर्ण और सही निर्णय मानते हैं. उस समय उन्हें हर महीने एक लाख रुपये से अधिक वेतन और अन्य सुविधाएं मिल रही थीं. इसके बावजूद उन्होंने अनिश्चित भविष्य को चुनते हुए विदेश में एक इंटर्नशिप का रास्ता अपनाया, जिसने उनकी जिंदगी की दिशा बदल दी.
नौकरी छोड़ने का बड़ा फैसला
अर्जुन जैन ने बताया कि याहू में काम करते हुए उन्हें अपने काम में उद्देश्य की कमी महसूस होने लगी थी. रोजमर्रा के तकनीकी काम उन्हें संतुष्टि नहीं दे रहे थे. ऐसे में उन्होंने इटली के फ्लोरेंस विश्वविद्यालय में कम वेतन वाली इंटर्नशिप का विकल्प चुना. यह कदम आर्थिक और करियर दोनों ही लिहाज से जोखिम भरा था, लेकिन उन्होंने इसे अपनाने का फैसला किया.
आर्थिक तंगी से गुजरे जैन
जैन के इस निर्णय पर उनके मैनेजर ने भी हैरानी जताई थी और इसे गलत कदम बताया था. नौकरी छोड़ने के कुछ महीनों बाद ही जैन को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा. फ्लोरेंस में उनका इंटर्नशिप खत्म हुआ और उन्हें नई नौकरी नहीं मिल सकी. इस दौरान उन्हें वीजा और पैसे दोनों से जुड़ी परेशानियां झेलनी पड़ीं.
लगातार चला असफलताओं का दौर
उन्होंने आगे बताया कि कई प्रतिष्ठित संस्थानों में आवेदन करने के बावजूद उन्हें बार-बार अस्वीकृति मिली. उच्च शिक्षा के लिए भी आर्थिक स्थिति उनके रास्ते में बाधा बनी. इस समय ने उन्हें मानसिक रूप से भी चुनौती दी, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और सीखने की जिज्ञासा बनाए रखी.
जिज्ञासा से मिली सफलता
अर्जुन जैन का मानना है कि उनके करियर की दिशा किसी योजना से नहीं, बल्कि जिज्ञासा से तय हुई. कठिन दौर के बाद उन्हें शोध और शिक्षा के क्षेत्र में अवसर मिले. आगे चलकर उन्होंने एआई के क्षेत्र में काम किया और अपना स्टार्टअप शुरू किया. आज वह अपने उस फैसले को सही मानते हैं, जिसने उन्हें नई पहचान दिलाई.