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खामेनेई की मौत से कर्नाटक के 'मिनी ईरान' में पसरा मातम, दुकानें बंद और गलियों में सन्नाटा

अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन से कर्नाटक के अलीपुरा गांव में शोक है. 'मिनी ईरान' के नाम से प्रसिद्ध इस गांव ने अपने आध्यात्मिक गुरु के सम्मान में तीन दिनों का स्वैच्छिक बंद घोषित किया है.

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Kanhaiya Kumar Jha

नई दिल्ली: कर्णाटक के चिक्काबल्लापुर जिले का अलीपुरा गांव, जो आज सन्नाटे में डूबा हुआ है और यहां का हर एक शख्स गमजदा है. 'मिनी ईरान' के नाम से प्रचलित इस गांव का रिश्ता ईरान के सुप्रीम लीडर रहे अयातुल्ला अली खामेनेई से इतना गहरा रहा है कि जैसे ही अमेरिका और इजरायल के संयुक्त ऑपरेशन में उनके मौत की खबर सामने आई, गांव में मातम का माहौल व्याप्त हो गया. शोक संतप्त लोगों ने स्वतः ही अपनी-अपनी दुकानें व अन्य प्रतिष्ठान बंद रखे. 

दरअसल, खामेनेई और अलीपुरा का नाता 1986 में शुरू हुआ था. राष्ट्रपति के रूप में उन्होंने यहां एक अस्पताल का उद्घाटन किया था. उस यात्रा ने ग्रामीणों के दिलों में उनके प्रति अटूट श्रद्धा भर दी थी. तब से यह गांव ईरान से भावनात्मक रूप से जुड़ गया और उनके प्रति सम्मान बढ़ता गया.

स्वैच्छिक बंद और सामूहिक शोक 

उनकी मृत्यु की सूचना मिलते ही ग्रामीणों ने खुद तीन दिनों के शोक का ऐलान किया. अलीपुरा में बंद के लिए किसी संगठन ने अपील नहीं की थी. हर आंख नम है और लोग अपने रहनुमा को याद कर रहे हैं, क्योंकि वे उन्हें अपनी सर्वोच्च आध्यात्मिक सत्ता मानते थे.

बेलिकुंटे से अलीपुरा तक आदिलशाही काल में शिया मुसलमानों के बसने के बाद गांव का नाम 'बेलिकुंटे' से अलीपुरा हुआ. यहां रहने वालों का ईरान और अरब देशों से व्यापार और शिक्षा का पुराना नाता है. खामेनेई की 1986 की यात्रा ने इस प्राचीन सांस्कृतिक संबंध को ग्रामीणों के बीच और अधिक मजबूत कर दिया था.

आस्था का रूहानी रिश्ता 

ग्रामीण शफीक के अनुसार, खामेनेई से उनका रिश्ता केवल व्यापार का नहीं, बल्कि गहरी आस्था का है. उनके आने से ईरान के साथ उनका रूहानी जुड़ाव मज़बूत हुआ. ग्रामीणों के लिए वे एक मार्गदर्शक थे जिनसे उन्हें हमेशा धार्मिक प्रेरणा और जीवन की सही दिशा मिलती रही.

खामेनेई का भारत और कश्मीर से विशेष लगाव था. 2012 में उन्होंने तत्कालीन पीएम मनमोहन सिंह से अपनी भारत यात्राओं का ज़िक्र भी किया था. 1989 में सुप्रीम लीडर बनने के बाद वे दोबारा भारत नहीं आए, लेकिन अलीपुरा के लोग उन्हें हमेशा अपने परिवार का हिस्सा मानते रहे.