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झारखंड में बैलेट पेपर से भी इंडिया गठबंधन को नहीं मिली बढ़त! क्या अब कर्नाटक में बदलेगा सियासी फैसला?

झारखंड निकाय चुनाव में बैलेट पेपर से मतदान के बावजूद इंडिया गठबंधन को सीमित सफलता मिली है. भाजपा समर्थित उम्मीदवारों के बेहतर प्रदर्शन के बाद कर्नाटक में बैलेट पेपर से पंचायत चुनाव कराने के फैसले पर बहस तेज हो गई है.

Kuldeep Sharma
Edited By: Kuldeep Sharma
झारखंड में बैलेट पेपर से भी इंडिया गठबंधन को नहीं मिली बढ़त! क्या अब कर्नाटक में बदलेगा सियासी फैसला?
Courtesy: ani

झारखंड के नगर निकाय चुनावों के नतीजों ने देश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है. लंबे समय से ईवीएम पर सवाल उठाने वाले विपक्षी दल बैलेट पेपर की वापसी की मांग करते रहे हैं. लेकिन झारखंड में बैलेट पेपर से मतदान होने के बावजूद इंडिया गठबंधन को अपेक्षित बढ़त नहीं मिली. इसके बाद अब कर्नाटक सरकार के उस फैसले पर सवाल उठने लगे हैं, जिसमें पंचायत चुनाव बैलेट पेपर से कराने की तैयारी है.

झारखंड के नतीजों ने बदला माहौल

झारखंड के हालिया निकाय चुनाव भले ही गैर-दलीय आधार पर हुए हों, लेकिन राजनीतिक दलों ने अपने समर्थित उम्मीदवार मैदान में उतारे थे. 48 सीटों में से भाजपा समर्थित 12 उम्मीदवार जीतने में सफल रहे. झामुमो समर्थित छह और कांग्रेस समर्थित केवल दो उम्मीदवारों को जीत मिली. इन नतीजों ने यह संकेत दिया कि बैलेट पेपर होने से परिणामों की दिशा बदलती ये जरूरी नहीं है.

ईवीएम बनाम बैलेट की पुरानी बहस

कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल लंबे समय से ईवीएम की पारदर्शिता पर सवाल उठाते रहे हैं. कई मौकों पर ईवीएम के बजाय बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग भी की गई. इसी पृष्ठभूमि में कर्नाटक सरकार ने पंचायत चुनाव बैलेट पेपर से कराने का प्रस्ताव आगे बढ़ाया था. सरकार का तर्क था कि इससे मतदान प्रक्रिया अधिक भरोसेमंद बनेगी और मतदाताओं का विश्वास मजबूत होगा.

कर्नाटक में बढ़ी सियासी हलचल

झारखंड के नतीजों के बाद कर्नाटक में यह सवाल उठ रहा है कि क्या बैलेट पेपर का फैसला सही समय पर लिया गया है. कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी हार-जीत कई कारकों पर निर्भर करती है, केवल मतदान प्रणाली पर नहीं. वहीं, कांग्रेस के भीतर भी इस फैसले को लेकर अलग-अलग राय सामने आ रही है. इससे राज्य की राजनीति में नई चर्चा शुरू हो गई है.

सरकार का पक्ष और तैयारी

कर्नाटक सरकार ने स्पष्ट किया है कि पंचायत चुनावों में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए बैलेट पेपर प्रणाली अपनाने की योजना बनाई गई है. ग्रामीण विकास एवं पंचायत राज विभाग की ओर से संबंधित संशोधन विधेयक को बजट सत्र में पेश करने की तैयारी है. सरकार का कहना है कि यह कदम स्थानीय स्तर पर विश्वास बहाल करने की दिशा में उठाया गया है.

आगे बदलेगा समीकरण?

अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या झारखंड के नतीजों का असर कर्नाटक के फैसले पर पड़ेगा. फिलहाल सरकार ने अपने रुख में बदलाव का संकेत नहीं दिया है, लेकिन सियासी चर्चा लगातार जारी है. आने वाले दिनों में यह तय होगा कि बैलेट पेपर की ओर लौटने का फैसला राजनीतिक रणनीति साबित होता है या नहीं.