कर्नाटक में सोमवार को मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार सरकार का बहुप्रतीक्षित मंत्रिमंडल विस्तार किया गया. इस दौरान 20 विधायकों ने मंत्री पद की शपथ ली. राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने बेंगलुरु स्थित लोक भवन में आयोजित समारोह में सभी नए मंत्रियों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई. सरकार गठन के करीब दो महीने बाद हुए इस विस्तार को कांग्रेस के लिए राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है.
राजनीतिक जानकारों के अनुसार, मंत्रिमंडल विस्तार में कांग्रेस नेतृत्व ने मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार और वरिष्ठ नेता सिद्धारमैया के समर्थकों के बीच संतुलन बनाने का प्रयास किया है. हाल ही में सिद्धारमैया ने 2028 का विधानसभा चुनाव नहीं लड़ने की घोषणा की थी. ऐसे में पार्टी के भीतर नेतृत्व और संगठनात्मक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए मंत्रियों का चयन किया गया है, ताकि सरकार और संगठन दोनों में सामंजस्य बना रहे.
इन नेताओं को मिली मंत्री पद की जिम्मेदारी
शपथ लेने वाले प्रमुख नेताओं में पीएम नरेंद्रस्वामी, शिवराज तंगदागी, रुद्रप्पा लमानी, केएस बसवनथप्पा, बी नागेंद्र, टी रघुमूर्ति, बीजेड ज़मीर अहमद खान, रिज़वान अरशद, संतोष लाड, मधु बंगारप्पा, पुत्तुरंगाशेट्टी, मंकला वैद्य, डॉ अजय सिंह, एन चालुवराय स्वामी, केएम शिवालिंगे गौड़ा, एचसी बालकृष्ण, गायत्री शांतेगौड़ा, बसवराज रायरेड्डी, विजयानंद कशप्पनवर, लक्ष्मण सावदी शामिल हैं. इन सभी को क्षेत्रीय और सामाजिक प्रतिनिधित्व को ध्यान में रखते हुए जगह दी गई है.
20 New ministers approved for inclusion into the Government of Karnataka:
— ANI (@ANI) August 3, 2026
PM Narendraswamy
Shivaraj Tangadagi
Rudrappa Lamani
KS Basavanthappa
B Nagendra
T Raghumoorthy
BZ Zameer Ahmed Khan
Rizwan Arshad
Santosh Lad
Madhu Bangarappa
Putturangashetty
Mankala Vaidya
Dr Ajay Singh… pic.twitter.com/UHCO5s2OKu
डी.के. शिवकुमार ने 3 जून को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी. उनके साथ पहले चरण में 13 मंत्रियों को शामिल किया गया था. यह विस्तार पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के 28 मई को पद छोड़ने के बाद बने नए राजनीतिक समीकरणों के बीच हुआ है. कांग्रेस नेतृत्व लंबे समय से मंत्रिमंडल विस्तार की तैयारी कर रहा था और विभिन्न क्षेत्रों व समुदायों को प्रतिनिधित्व देने पर मंथन चल रहा था.
मंत्रिमंडल विस्तार को केवल प्रशासनिक कदम नहीं, बल्कि कांग्रेस की राजनीतिक रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है. पार्टी की कोशिश है कि सरकार के भीतर सभी प्रमुख नेताओं और क्षेत्रों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिले, जिससे आगामी स्थानीय निकाय और 2028 के विधानसभा चुनाव से पहले संगठन मजबूत हो सके. अब नए मंत्रियों के प्रदर्शन और सरकार की कार्यशैली पर विपक्ष सहित राजनीतिक विश्लेषकों की नजर रहेगी.