कर्नाटक के पूर्व मंत्री भीमन्ना खांड्रे का 102 साल की उम्र में निधन हो गया है. इस बात की जानकारी उनके बेटे ईश्वर खांड्रे ने दी है. ईश्वर इस समय कर्नाटक के वन मंत्री है. भीमन्ना खांड्रे का शुक्रवार देर रात उनके घर पर निधन हो गया. वह कुछ समय से उम्र संबंधी स्वास्थ्य समस्याओं के कारण बीमार थे. बता दें कि भीमन्ना खांड्रे एक जाने-माने स्वतंत्रता सेनानी, वरिष्ठ कांग्रेस नेता और कल्याणा कर्नाटक क्षेत्र में सहकारी आंदोलन के एक महत्वपूर्ण व्यक्ति थे. वह वीरशैव लिंगायत समुदाय के एक सम्मानित नेता भी थे.
ईश्वर खंड्रे ने कहा कि शनिवार को लोग भालकी के गांधी गंज में उनके पिता के घर पर उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि दे सकते हैं. अंतिम संस्कार शाम को भालकी के शांतिधाम में वीरशैव लिंगायत परंपराओं के अनुसार किया जाएगा. मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, उपमुख्यमंत्री डी के शिवकुमार, पूर्व मुख्यमंत्री बी एस येदियुरप्पा और बसवराज बोम्मई, और कई अन्य राष्ट्रीय और राज्य नेताओं सहित कई नेताओं ने उनकी मृत्यु पर गहरा दुख व्यक्त किया और राष्ट्र और कर्नाटक के लिए उनकी आजीवन सेवा को श्रद्धांजलि दी.
उनके निधन पर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने खांड्रे के निधन पर दुख जताया है. उन्होंने लिखा- वरिष्ठ कांग्रेस नेता श्री भीमन्ना खांड्रे के निधन से दुख हुआ. एक स्वतंत्रता सेनानी, शिक्षाविद और कद्दावर कांग्रेसी नेता, उन्होंने अपना पूरा जीवन देश और कर्नाटक के लोगों की सेवा में समर्पित कर दिया. देखें पोस्ट-
Saddened by the demise of senior Congress leader Sri Bheemanna Khandre.
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) January 17, 2026
A freedom fighter, educationist, and stalwart Congressman, he devoted his entire life to the service of the nation and the people of Karnataka.
My heartfelt condolences to Eshwar Khandre ji, the Khandre… pic.twitter.com/66u4tEvrD3
बता दें कि पिछले 10 से 12 दिनों से, भीमन्ना खांड्रे को सांस लेने में तकलीफ हो रही थी. इसके साथ ही उन्हें उम्र संबंधित कई बीमारियां बी थीं. उन्हें पहले बीदर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, लेकिन बाद में उन्हें भालकी में उनके घर वापस लाया गया, जहां उनका इलाज जारी रहा. इसके बाद कलर रात उनका निधन हो गया.
भीमन्ना खांड्रे एक वकील थे. सार्वजनिक जीवन में उनकी यात्रा 1953 में शुरू हुई. इस समय वो भालकी नगर पालिका के पहले निर्वाचित अध्यक्ष बने. इसके बाद 1962 में, उन्होंने कर्नाटक विधानसभा में एंट्री की. वह चार बार विधायक चुने गए और दो बार विधान परिषद के सदस्य के तौर पर भी काम किया. उन्होंने क्षेत्र में सहकारी चीनी उद्योग के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
वह हल्लीखेड़ा में बीदर सहकारी चीनी फैक्ट्री और हुंजी में महात्मा गांधी चीनी फैक्ट्री के संस्थापक अध्यक्ष थे. इन परियोजनाओं ने किसानों की मदद की और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा दिया. भीमन्ना खांड्रे ने नारंजा और करंजा सिंचाई परियोजनाओं को लागू करने में मदद करके कृषि का भी समर्थन किया, जिससे किसानों के लिए पानी की आपूर्ति में सुधार हुआ और क्षेत्र में कृषि मजबूत हुई.
एक स्वतंत्रता सेनानी के रूप में, उन्होंने रजाकार अत्याचारों का कड़ा विरोध किया और यह सुनिश्चित करने के लिए कड़ी मेहनत की कि राज्य के एकीकरण के दौरान बीदर जिला कर्नाटक का हिस्सा बना रहे. शिक्षा उनके दिल के बहुत करीब थी. शांतिवर्धक एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस के प्रेसिडेंट के तौर पर, उन्होंने बीदर में अक्का महादेवी कॉलेज और भालकी में एक इंजीनियरिंग कॉलेज शुरू करने में मदद की. उन्होंने समुदाय के टॉप संगठन, वीरशैव लिंगायत महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में भी काम किया, जिससे उनका प्रभाव और नेतृत्व और भी साफ हुआ.