कर्नाटक: कर्नाटक के बेलगावी जिले में एक अनोखी और पुरानी बावड़ी को दोबारा जीवित कर दिया गया है. यह बावड़ी करीब 300 साल पुरानी है. लंबे समय तक कचरा और मलबे में दबी रहने के बाद अब इसमें फिर से पानी आने लगा है. सबसे खास बात यह है कि ऊपर से देखने पर यह बावड़ी शिवलिंग की शक्ल में नजर आती है.
यह बावड़ी आदिलशाही वंश के समय की बताई जा रही है. उस दौर में पानी को संरक्षित रखने के लिए ऐसी सुंदर और मजबूत बावड़ियां बनाई जाती थीं. समय के साथ यह बावड़ी बंद हो गई और कचरे में दब गई. लेकिन स्थानीय लोगों और अधिकारियों की मेहनत से इसे फिर से नया जीवन मिल गया है.
स्थानीय प्रशासन और आम लोगों ने मिलकर इस काम को अंजाम दिया. बावड़ी के अंदर जमा सैकड़ों टन कचरा, मिट्टी और पत्थर हटाए गए. पुरानी दीवारों की मरम्मत की गई. अब बावड़ी पूरी तरह साफ और सुंदर दिख रही है. इसमें 53 सीढ़ियां हैं, जो नीचे तक जाती हैं. लोग अब आसानी से पानी तक पहुंच सकते हैं.
VIDEO | A remarkable piece of heritage has been restored in Karnataka's Belagavi district. A 300-year-old stepwell, which had been buried under garbage and debris, has been brought back to life.
The 80-feet-deep stepwell, believed to have been built during the Adil Shahi dynasty… pic.twitter.com/QVVgvE2nsL— Press Trust of India (@PTI_News) July 3, 2026Also Read
PTI न्यूज एजेंसी ने इस बावड़ी का वीडियो शेयर किया है. वीडियो में साफ दिख रहा है कि बावड़ी कितनी खूबसूरत और अनोखी है. ऊपर से इसका आकार ठीक शिवलिंग जैसा लगता है, जो देखने वालों को हैरान कर देता है.
बेलगावी जिले में कई इलाकों में पानी की कमी रहती है. ऐसी पुरानी बावड़ियों को फिर से चालू करने से भूजल स्तर बढ़ेगा और लोगों को पीने का साफ पानी मिल सकेगा. यह बावड़ी अब सिर्फ पुरानी इमारत नहीं, बल्कि इलाके के लिए उपयोगी संपत्ति बन गई है.
यह उदाहरण दिखाता है कि अगर इंसान चाहे तो पुरानी चीजों को नई जान दे सकता है. भारत में हजारों ऐसी बावड़ियां, कुएं और तालाब हैं जो समय के साथ खराब हो गए. इन्हें बचाने और दोबारा उपयोगी बनाने की जरूरत है. स्थानीय लोगों ने इस काम में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया. उन्होंने कहा कि यह बावड़ी सिर्फ पानी का स्रोत नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक विरासत भी है. अब इसे साफ-सुथरा रखने और संरक्षित करने की जिम्मेदारी सबकी है.