लोहरदगा: जिले में एक गंभीर रेल दुर्घटना होते-होते रह गई. कोयल नदी पर बने रेलवे पुल की जर्जर हालत के बावजूद राजधानी एक्सप्रेस और सासाराम एक्सप्रेस वहां से गुजर गईं. बाद में पुल में खतरनाक दरारें सामने आईं, जिसके बाद रेलवे कर्मियों ने सतर्कता दिखाते हुए मेमू ट्रेन को समय रहते रोक दिया. यात्रियों को ट्रेन से उतारकर पैदल पुल पार कराया गया. इस घटना ने रेलवे सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
कोयल नदी पर बने रेलवे पुल से राजधानी एक्सप्रेस और सासाराम एक्सप्रेस के सुरक्षित गुजरने के बाद जब रेलवे स्टाफ ने नियमित निरीक्षण किया, तो उन्हें पुल की हालत संदिग्ध लगी. जांच में सामने आया कि पुल के दो पिलर क्षतिग्रस्त हो चुके हैं. पिलर नंबर पांच पहले से मरम्मत के दायरे में था, लेकिन उसमें नई दरारें उभर आईं. साथ ही पिलर नंबर चार में भी संरचनात्मक कमजोरी दिखी.
इसी दौरान रांची से चंदवा-टोरी जा रही मेमू ट्रेन लोहरदगा पहुंचने वाली थी. पुल की स्थिति की गंभीरता समझते हुए रेलवे कर्मियों ने तुरंत सिग्नल देकर ट्रेन को पुल से पहले ही रोक दिया. यदि यह ट्रेन पुल पर पहुंच जाती, तो सैकड़ों यात्रियों की जान खतरे में पड़ सकती थी. कर्मचारियों की सतर्कता से एक बड़े रेल हादसे को टाल लिया गया.
अचानक ट्रेन रुकने से यात्रियों में घबराहट फैल गई. हालांकि रेलवे कर्मचारियों ने हालात को संभालते हुए यात्रियों को स्थिति की जानकारी दी. सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए सभी यात्रियों को ट्रेन से उतारा गया और रेलवे ट्रैक के सहारे पैदल ही पुल पार कराया गया. कड़ी मशक्कत के बाद यात्रियों को सुरक्षित लोहरदगा स्टेशन पहुंचाया गया, जिससे सभी ने राहत की सांस ली.
घटना की सूचना मिलते ही रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी और तकनीकी टीम मौके पर पहुंची. प्रारंभिक जांच के बाद कोयल नदी पुल पर रेल परिचालन तत्काल रोक दिया गया. 7 जनवरी तक इस रूट से सभी ट्रेनों को रोकने का फैसला लिया गया है. राजधानी एक्सप्रेस को बरकाकाना के रास्ते डायवर्ट किया गया, जबकि मेमू ट्रेन को फिलहाल नागजुआ तक ही चलाया जा रहा है.
रांची और लोहरदगा को जोड़ने वाला यह पुल करीब 20 साल पुराना बताया जा रहा है. रेलवे अधिकारियों का मानना है कि पुल के आसपास लंबे समय से हो रहे अवैध बालू उठाव ने इसकी नींव को कमजोर किया है. कोयल नदी से बड़े पैमाने पर बालू तस्करी की शिकायतें पहले भी सामने आती रही हैं. अब इस घटना के बाद पुल की मजबूती और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं.