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कौन है जिम्मेदार? झारखंड JSSC के उम्मीदवार को गेट बंद होने से ठीक पहले मिला एडमिट कार्ड का ईमेल

झारखंड के एक अभ्यर्थी ने आरोप लगाया है कि JSSC ने फील्ड वर्कर परीक्षा का एडमिट कार्ड परीक्षा वाले दिन दोपहर 2:59 बजे भेजा, जबकि परीक्षा केंद्र का गेट 3 बजे बंद होना था.

Km Jaya
Edited By: Km Jaya
कौन है जिम्मेदार? झारखंड JSSC के उम्मीदवार को गेट बंद होने से ठीक पहले मिला एडमिट कार्ड का ईमेल
Courtesy: Chatgpt

रांची: झारखंड कर्मचारी चयन आयोग यानी JSSC की फील्ड वर्कर प्रतियोगिता परीक्षा 2024 को लेकर एक अभ्यर्थी के गंभीर आरोपों ने भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता और जवाबदेही पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं. पश्चिम सिंहभूम जिले के चक्रधरपुर प्रखंड के हथिया पंचायत स्थित रामदा गांव निवासी राजेश लोहार का दावा है कि उन्हें परीक्षा वाले दिन दोपहर 2:59 बजे ईमेल के जरिए एडमिट कार्ड की सूचना मिली. 

जबकि परीक्षा केंद्र में प्रवेश का समय दोपहर 3 बजे तक ही निर्धारित था. ऐसे में उनके पास परीक्षा में शामिल होने का कोई वास्तविक अवसर नहीं बचा. राजेश लोहार के अनुसार उन्होंने वर्ष 2024 में JSSC फील्ड वर्कर भर्ती के लिए आवेदन किया था और करीब दो वर्षों से परीक्षा का इंतजार कर रहे थे. 

कब मिला ईमेल?

उनका कहना है कि 19 जुलाई 2026 को परीक्षा के दिन दोपहर 2:59 बजे उन्हें ईमेल प्राप्त हुआ, जिसमें एडमिट कार्ड डाउनलोड करने की जानकारी दी गई थी. उन्होंने ईमेल का स्क्रीनशॉट भी साझा किया है, जिसमें यही समय दर्ज दिखाई देता है.

अभ्यर्थी के अनुसार परीक्षा पोर्टल पर उन्हें लातेहार जिले में परीक्षा केंद्र आवंटित किया गया था. तीसरी पाली की परीक्षा दोपहर 3:30 बजे से शाम 5:30 बजे तक निर्धारित थी, जबकि परीक्षा केंद्र का गेट 3 बजे बंद होना था. ऐसे में गेट बंद होने से ठीक एक मिनट पहले सूचना मिलने के कारण परीक्षा में पहुंचना असंभव था.

राजेश का क्या है कहना?

राजेश का कहना है कि उस समय वह जमशेदपुर में दिहाड़ी मजदूरी कर रहे थे. जमशेदपुर से लातेहार की दूरी लगभग 240 किलोमीटर है, जिसे सड़क मार्ग से तय करने में करीब पांच घंटे लगते हैं. उनका कहना है कि समय पर एडमिट कार्ड मिलने पर वह पहले से यात्रा की योजना बनाकर परीक्षा में शामिल हो सकते थे. उन्होंने दावा किया कि उन्होंने इस परीक्षा की तैयारी के लिए कई महीनों तक मेहनत की थी.

किसकी होगी जिम्मेदारी?

इस पूरे मामले ने JSSC की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. यदि किसी अभ्यर्थी को परीक्षा से ठीक पहले एडमिट कार्ड की सूचना मिलती है, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी. क्या यह तकनीकी गड़बड़ी थी या प्रशासनिक लापरवाही. यदि जांच में आयोग की गलती सामने आती है, तो क्या प्रभावित अभ्यर्थी को दोबारा अवसर मिलेगा.

झारखंड में पहले भी भर्ती परीक्षाओं में देरी और कथित अनियमितताओं को लेकर अभ्यर्थी सवाल उठाते रहे हैं. यदि राजेश लोहार के आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला केवल एक तकनीकी त्रुटि तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि समान अवसर और भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर भी बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा करेगा. अब सभी की नजर इस बात पर है कि JSSC इस मामले की निष्पक्ष जांच कर अभ्यर्थी को उचित राहत देता है या नहीं.