झारखंड में आज राज्यव्यापी बंद, छात्रों पर लाठीचार्ज को लेकर BJP का हमला
झारखंड में जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं में गड़बड़ी के खिलाफ छात्रों का विरोध प्रदर्शन जारी है. भाजपा झारखंड अध्यक्ष ने कहा कि सैकड़ों छात्र लाठीचार्ज में घायल हुए हैं. पार्टी आज राज्यव्यापी बंद का समर्थन कर रही है.
रांची: झारखंड में जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं में गड़बड़ी के खिलाफ छात्रों का विरोध प्रदर्शन जारी है. सोमवार को रांची में छात्रों ने विधानसभा घेराव करने की कोशिश की. पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लाठी और पानी की बौछार का इस्तेमाल किया. इस दौरान कई छात्र घायल हो गए. अब पुलिस की इस कार्रवाई पर भाजपा झारखंड अध्यक्ष आदित्य साहू ने हेमंत सोरेन सरकार पर तीखा हमला बोला.
उन्होंने कहा कि सैकड़ों छात्र लाठीचार्ज में घायल हुए हैं. पार्टी आज राज्यव्यापी बंद का समर्थन कर रही है. झारखंड के छात्रों पर हेमंत सोरेन सरकार द्वारा किए गए अन्याय और कथित बर्बरता के विरोध में, राज्य में कल बंद रहेगा. बीजेपी का हर कार्यकर्ता यह सुनिश्चित करने के लिए पूरी ताकत से काम करेगा कि यह बंद सफल हो.
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आदित्य साहू का कहना है कि छात्रों पर अन्याय और अत्याचार हुआ है. नौकरियां बेची जा रही हैं, परीक्षा के पेपर पहले से लीक हो रहे हैं और बच्चों पर बर्बर तरीके से लाठियां बरसाई गईं. रात के अंधेरे में और दिन में भी आंसू गैस के गोले दागे गए. सैकड़ों बच्चे घायल हैं. ये हमारे बच्चे हैं. इसलिए उनके समर्थन में भाजपा कार्यकर्ता सड़कों पर उतरेंगे.
छात्रों की मांग क्या है?
प्रदर्शनकारी जेएसएससी सीजीएल परीक्षा रद्द करने, कथित गड़बड़ियों की सीबीआई जांच कराने और भर्ती प्रक्रिया में सुधार की मांग कर रहे हैं. वे कई दिनों से धरना और अनशन कर रहे हैं. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि सरकार छात्रों के अपनी बात रखने के अधिकार का सम्मान करती है. उनकी मांगों पर बातचीत के जरिए समाधान निकाला जाएगा. उन्होंने प्रशासन और पुलिस अधिकारियों को संयम, संवेदनशीलता और जिम्मेदारी से स्थिति संभालने के लिए धन्यवाद दिया.
प्रशासन का रुख:
रांची के उपायुक्त मनजुनाथ भजनत्री और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक राकेश रंजन ने रात को प्रेस कॉन्फ्रेंस की. उपायुक्त ने कहा कि स्कूल प्रबंधन खुद फैसला करें. बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता दें और कोई परेशानी न हो. कई स्कूलों ने बंद रहने का फैसला किया है. कुछ असामाजिक तत्व हिंसा कर रहे हैं और संवैधानिक अधिकारों का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं, इसलिए स्कूलों को स्थिति देखकर फैसला करने की सलाह दी गई.