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परीक्षा से पहले टूटा बेटे का पैर, दो किलोमीटर तक पीठ पर उठाकर पिता ने पहुंचाया एग्जाम सेंटर

झारखंड में एक पिता बेटे का एक्सीडेंट होने के बाद उसे पीठ पर उठाकर परीक्षा दिलवाने परीक्षा केंद्र पर पहुंचा. इस पूरे नजारा को देख लोग भी भावुक हो गए हैं.

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Edited By: Shanu Sharma
परीक्षा से पहले टूटा बेटे का पैर, दो किलोमीटर तक पीठ पर उठाकर पिता ने पहुंचाया एग्जाम सेंटर
Courtesy: X (@The_FollowUp)

रांची: झारखंड के हजारीबाग से दिल को छू देने वाला मामला सामने आया है. जिसमें एक पिता का प्रेम देख लोग भावुक हो गए. यह मामला केरेडारी प्रखंड के प्लस टू विद्यालय परिसर की है, जिसमें एक पिता अपने बेटे को कंधे पर विठाकर परीक्षा दिलवाने परीक्षा केंद्र पर पहुचा. 

माता-पिता को अपने बच्चे की चिंता सबसे ज्यादा होती है, इस बात में कोई संशय नहीं है. इसका उदाहरण एक बार लोगों को देखने को मिला. जब एक पिता अपने बच्चे के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए उसे पीठ पर उठाकर परीक्षा दिलानें पहुंचे. 

कैसे टूटा लड़के का पैर?

बेलतू गांव के रहने वाले ओम प्रकाश कुमार मैट्रिक की परीक्षा दे रहे हैं. हालांकि शनिवार को परीक्षा देकर घर लौटते समय एक तेज रफ्तार बाइक ने उन्हें टक्कर मार दी, जिससे उनका बायां पैर गंभीर रूप से चोटिल हो गया. ऐसे में टूटे पांव के साथ परीक्षा केंद्र पर जाना लगभग नामुमकिन हो चुका था. लेकिन पढ़ाई के महत्व को समझते हुए और अपने बच्चे की भविष्य को देखते हुए ओम के पिता रामवृक्ष साव ने अपने बेटे को पीठ पर उठाकर दो किलोमीटर तक चलकर परीक्षा केंद्र तक पहुंचाया. क्योंकि लड़के को पैरो में चोट आई थी और हाथ ठीक थे, ऐसे में उसने भी परीक्षा देकर अपने एक साल को बचाने की पूरी कोशिश की.

पिता-बेटे की कहानी से भावुक हुए लोग

सोशल मीडिया पर बेटे और पिता के इस कहानी चर्चा काफी जा रही है. लोग पिता के निस्वार्थ प्रेम से भावुक हुए है. लोगों ने माना है कि एक पिता ही अपने बच्चे की भविष्य की चिंता करते हैं और उनके तरह प्रेम शायद ही कोई कर पाया. वहीं कुछ लोगों ने लड़के की भी तारीफ की है कि एक्सीडेंट होने के बाद भी टूटे पैरों के साथ लड़का परीक्षा देने इसलिए पहुंचा क्योंकि उसे पढ़ाई का महत्व मालूम है. परीक्षा केंद्र पर पहुंचते ही मौजूदा शिक्षकों और कर्मचारियों ने उनकी मदद की और परीक्षा दिलवाया. बेटे और पिता की यह कहानी पूरे इलाके में एक मोटीवेशनल स्टोरी की तरह फैल चुकी है. लोग अपने भी बच्चों को पढ़ाई के महत्व को समझाने के लिए यह कहानी सुना रहे हैं.