menu-icon
India Daily

पहलगाम हमले में शहीद नेवी लेफ्टिनेंट विनय नरवाल को अंतिम विदाई, बहन ने दिया कंधा; सामने आया परिवार का दर्द

जम्मू-कश्मीर में आतंकी हमले में शहीद हुए नेवी लेफ्टिनेंट विनय नरवाल का करनाल में अंतिम संस्कार हुआ. उनकी बहन सृष्टि ने अर्थी को कंधा दिया और दर्दनाक बयान दिया कि अगर वे सेना में होते तो शायद बच जाते.

anvi shukla
Edited By: Anvi Shukla
पहलगाम हमले में शहीद नेवी लेफ्टिनेंट विनय नरवाल को अंतिम विदाई, बहन ने दिया कंधा; सामने आया परिवार का दर्द
Courtesy: social media

Lt. Vinay Narwal Pahalgam Terror Attack: जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकियों के हमले में शहीद हुए भारतीय नौसेना के लेफ्टिनेंट विनय नरवाल का बुधवार (23 अप्रैल) को करनाल में भावपूर्ण अंतिम संस्कार किया गया. उनके पार्थिव शरीर को पूरे सम्मान के साथ अंतिम यात्रा पर ले जाया गया. इस यात्रा में करनाल के लोगों ने पुष्पवर्षा कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके साहस और बलिदान को सलाम किया. विनय की बहन सृष्टि और चचेरे भाई ने उनका अंतिम संस्कार किया.

लेफ्टिनेंट विनय नरवाल के परिवार का दर्द उन अंतिम क्षणों में नजर आया, जब उनकी बहन सृष्टि ने अपने भाई की अर्थी को कंधा दिया. सृष्टि की आंखों में आंसू थे और वे कह रही थीं, 'विनय एक घंटे तक वहीं पड़ा रहा, लेकिन कोई मदद के लिए नहीं आया. अगर वह आर्मी से होता तो उसे बचाया जा सकता था. जिसने मेरे भाई को मारा, वो मुझे मुर्दा देखना है.' उनके इस दर्दनाक बयान ने सभी को हिलाकर रख दिया. 

CM नायब सैनी ने दी श्रद्धांजलि

राज्य के मुख्यमंत्री नायब सैनी और पूर्व उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला भी शहीद के परिवार से मिलने पहुंचे और उन्हें सांत्वना दी. सृष्टि ने CM नायब सैनी से मिलकर अपना दुःख बताया और कहा कि 'विनय को एक घंटे तक मदद नहीं मिली.' इस पर मुख्यमंत्री नायब सैनी ने कहा, 'वो मरेगा जिसने विनय को मारा.' 

अंतिम यात्रा में जनसैलाब उमड़ा

शहीद लेफ्टिनेंट की अंतिम यात्रा में भारी जनसैलाब उमड़ पड़ा. लोग 'विनय नरवाल अमर रहे' और 'पाकिस्तान मुर्दाबाद' के नारे लगा रहे थे. यह नारे उनके बलिदान और शौर्य को सम्मान देने के रूप में गूंज उठे. 

पहलगाम में आतंकियों ने किया हमला

यह घटना 22 अप्रैल को पहलगाम के बैसरन घाटी में हुई, जहां आतंकियों ने विनय नरवाल से उनका नाम पूछा और फिर बिना किसी चेतावनी के उन्हें सिर में गोली मार दी. इस घटना के समय उनकी पत्नी भी उनके साथ थीं. आतंकियों के द्वारा की गई यह क्रूरता शहीद के परिवार के लिए अविश्वसनीय और दुखद थी.