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ओम प्रकाश चौटाला 5 बार रहे हरियाणा के CM, जानें शिक्षक भर्ती घोटोले ने कैसे बर्बाद किया इनेलो प्रमुख का राजनीतिक करियर

हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला का आज 89 साल की उम्र में निधन हो गया. वह 5 बार के मुख्यमंत्री और 7 बार के विधायक रह चुके हैं. 

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Kamal Kumar Mishra

Om Prakash Chautala: ओमप्रकाश चौटाला की गिनती भारतीय राजनीति के बड़े नेताओं में की जाती है. चौटाला हरियाणा राज्य के जाने-माने नेता और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सहयोगी इंडियन नेशनल लोक दल (INLD) के नेता रहे हैं.  

ओमप्रकाश चौटाला का जन्म 1 जनवरी 1935 को हरियाणा राज्य के झज्जर जिले के महम गांव में हुआ था. चौटाला एक किसान परिवार से हैं और उनका संबंध एक पारंपरिक जाट समुदाय से है. चौटाला के पिता चौधरी देवी लाल हरियाणा के मुख्यमंत्री और देश के उप प्रधानमंत्री रहे. घर में राजनीति का माहौल था, जिसने उनकी आगे की जिंदगी का सफर भी पहले ही तय कर दिया था. ओमप्रकाश चौटाला ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) से की थी, लेकिन बाद में 1975 में उन्होंने इंडियन नेशनल लोक दल (INLD) का गठन किया.

 चौटाला ने हमेशा हरियाणा में जाट समुदाय के अधिकारों की पैरवी की और उन्होंने पिछड़े वर्गों के लिए कई योजनाओं की शुरुआत की. उनके कार्यकाल में हरियाणा में शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे में सुधार हुए.

2000 का भर्ती घोटाला

ओमप्रकाश चौटाला और उनके बेटे अजय चौटाला पर साल 2000 में हरियाणा के स्कूलों में शिक्षकों की भर्ती में अनियमितता के आरोप लगे थे. इसके लिए उन्हें सजा भी हुई, हालांकि बाद में उन्हें कुछ राहत मिली. हालांकि इस घोटाले ने ओम प्रकाश चौटाला के राजनीतिक करियर को बर्बाद कर दिया. इसके बाद 2013 में चौटाला को फिर से एक अन्य घोटाले के मामले में दोषी ठहराया गया और उन्हें सजा दी गई. 

ओमप्रकाश के दो बेटे

ओमप्रकाश चौटाला की पत्नी का नाम सत्यवती चौटाला है. उनके दो बेटे हैं अजय चौटाला और दुष्यंत चौटाला. उनके बेटे दुष्यंत चौटाला को भारतीय राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए जाना जाता है और वे वर्तमान में जननायक जनता पार्टी (JJP) के प्रमुख हैं.

चौटाला को अंग्रेजी में मिले थे 88 नंबर

चौटाला का योगदान हरियाणा में समाज के विभिन्न वर्गों के लिए विकास योजनाओं को लागू करने में महत्वपूर्ण रहा है, लेकिन उनके विवादास्पद कार्यों और कानूनी मामलों ने उनकी छवि को प्रभावित किया. वे भारतीय राजनीति में एक मजबूत और प्रभावशाली नेता के रूप में उभरे हैं. साल 2017 में तिहाड़ जेल में रहकर ओमप्रकाश चौटाला ने 10वीं की परीक्षा पास की थी. चौटाला को अंग्रेजी विषय में 88 नंबर मिले थे.