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मानवता की मिसाल... दफ्तर नहीं आ सकीं 95 वर्षीय महिला, तो अफसर खुद घर लेने पहुंचे बयान

रोहतक में प्रशासनिक संवेदनशीलता की एक मिसाल देखने को मिली है. एसडीएम आशीष कुमार ने 95 वर्षीय बीमार महिला सुरती देवी के बयान उनके दफ्तर में नहीं, बल्कि उनकी कार में ही दर्ज किए. महिला इतनी कमजोर थीं कि कार्यालय तक नहीं आ पा रही थीं.

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Edited By: Antima Pal
मानवता की मिसाल... दफ्तर नहीं आ सकीं 95 वर्षीय महिला, तो अफसर खुद घर लेने पहुंचे बयान
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रोहतक: रोहतक में प्रशासनिक संवेदनशीलता की एक मिसाल देखने को मिली है. एसडीएम आशीष कुमार ने 95 वर्षीय बीमार महिला सुरती देवी के बयान उनके दफ्तर में नहीं, बल्कि उनकी कार में ही दर्ज किए. महिला इतनी कमजोर थीं कि कार्यालय तक नहीं आ पा रही थीं.

दफ्तर नहीं आ सकीं 95 वर्षीय महिला

सुरती देवी अपने बेटों को जमीन में हिस्सेदारी देने के लिए लघु सचिवालय पहुंची थीं. लेकिन उम्र और बीमारी के कारण वे कार से उतरने की हालत में नहीं थीं. परिवार वाले उन्हें अंदर ले जाने की कोशिश कर रहे थे, पर यह संभव नहीं हो पा रहा था.

अफसर खुद घर लेने पहुंचे बयान

जब एसडीएम आशीष कुमार को यह जानकारी मिली तो उन्होंने तुरंत फैसला लिया. वे खुद पार्किंग में खड़ी कार के पास पहुंच गए. वहीं बैठकर उन्होंने सुरती देवी से बातचीत की और उनका बयान दर्ज किया. जमीन के बंटवारे से जुड़ी पूरी जानकारी समझने के बाद उन्होंने महिला से तस्दीक भी करवाई और अंगूठा लगवाया.

एसडीएम के इस रवैये से वहां मौजूद लोगों ने उनकी काफी तारीफ की. कई लोगों ने कहा कि अगर अधिकारी इसी तरह बुजुर्गों और जरूरतमंदों की हालत समझकर काम करें तो आम जनता का प्रशासन पर भरोसा और बढ़ेगा. सुरती देवी की उम्र 95 साल है. वे लंबे समय से बीमार चल रही हैं. ऐसे में उन्हें दफ्तर बुलाकर खड़ा रखना या इंतजार करवाना मुश्किल होता. एसडीएम ने यह समझते हुए पूरी प्रक्रिया कार में ही पूरी कर दी. इससे महिला और उनके परिवार को काफी राहत मिली.

यह घटना दिखाती है कि सरकारी कामकाज सिर्फ नियमों तक सीमित नहीं होना चाहिए. जब जरूरत हो तो अधिकारी खुद आगे बढ़कर नागरिकों की सुविधा का ख्याल रखें. रोहतक में एसडीएम आशीष कुमार का यह कदम लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है.