menu-icon
India Daily

फरीदाबाद जिला स्वास्थ्य विभाग का बड़ा फैसला, गर्भवती महिलाओं के साथ पति का भी HIV और सिफलिस टेस्ट अनिवार्य

हरियाणा के फरीदाबाद जिला के स्वास्थ्य विभाग ने एक बड़ा फैसला लिया है. जिसके तहत महिलाओं और नवजात की सुरक्षा के लिए गर्भवती महिलाओं के साथ-साथ उनके पति का भी एचआईवी टेस्ट किया जाएगा. साथ ही सिफलिस टेस्ट भी अनिवार्य कर दिया गया है.

shanu
Edited By: Shanu Sharma
फरीदाबाद जिला स्वास्थ्य विभाग का बड़ा फैसला, गर्भवती महिलाओं के साथ पति का भी HIV और सिफलिस टेस्ट अनिवार्य
Courtesy: Pinterest

फरीदाबाद जिला स्वास्थ्य विभाग ने प्रेग्नेंट महिलाओं और नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य को लेकर एक बड़ा फैसला लिया है. जिसके तहत अब प्रेग्नेंट महिला के साथ उसके पति का भी एचआईवी टेस्ट अनिवार्य कर दिया गया है. साथ ही पति का सिफलिस टेस्ट भी जरूरी किया गया है. स्वास्थ्य निदेशालय की ओर से निर्देश जारी कर दिए गए हैं, जिसके बाद यह व्यवस्था लागू की गई है.

HIV टेस्ट पहले केवल प्रेग्नेंट महिलाओं का किया जाता था, लेकिन अब पति-पत्नी दोनों की जांच अनिवार्य कर दी गई है. स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि संक्रमण कई बार पुरुष से महिला और फिर मां से बच्चे में पहुंच जाता है. इस फैसले का मुख्य उद्देश्य मां से बच्चे में होने वाले संक्रमण को पूरी तरह रोकना है.

क्या है डॉक्टरों की राय?

जिला एचआईवी-एड्स नियंत्रण विभाग के अनुसार, फरीदाबाद में हर साल तीन से चार बच्चे एचआईवी संक्रमित होकर जन्म ले रहे हैं. ऐसे बच्चों का जीवन बेहद कष्टपूर्ण होता है. नए फैसले से विभाग का लक्ष्य है कि नवजात शिशुओं में एचआईवी और सिफलिस के नए मामले शून्य किए जाएं. यह जांच अब बीके अस्पताल समेत सभी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर की जाएगी. साथ ही निजी अस्पतालों को भी इस अभियान में शामिल किया गया है.

स्वास्थ्य विभाग ने सभी चिकित्सा संस्थानों को सख्त निर्देश दिए हैं किप्रेग्नेंट महिला की पहली जांच के समय ही उनके पति का एचआईवी और सिफलिस टेस्ट भी अनिवार्य रूप से कराया जाए. डॉक्टरों का कहना है कि कई बार पुरुषों में संक्रमण होता है, लेकिन उन्हें इसकी जानकारी नहीं होती. इससे पूरा परिवार प्रभावित हो जाता है. पति की जांच अनिवार्य करने से समय रहते संक्रमण का पता चल जाएगा और उचित उपचार शुरू किया जा सकेगा.

एचआईवी नियंत्रण की दिशा में मजबूत कदम

फरीदाबाद के उपमुख्य चिकित्सा अधिकारी ने कहा कि स्वास्थ्य निदेशालय के निर्देशों का पालन सभी के लिए अनिवार्य है. इस पहल से लोग खुद भी जागरूक हो रहे हैं और जांच के लिए आगे आ रहे हैं. हमारा प्रयास है कि कोई भी बच्चा एचआईवी या सिफलिस के साथ जन्म न ले. यह फैसला न सिर्फ एचआईवी नियंत्रण की दिशा में मजबूत कदम है, बल्कि समाज में जागरूकता बढ़ाने और परिवार को स्वस्थ रखने का भी माध्यम बनेगा. स्वास्थ्य विभाग ने अपील की है कि गर्भावस्था की पहली जांच के समय दंपत्ति दोनों को टेस्ट अवश्य कराना चाहिए.