गुरुग्राम: हरियाणा में स्वास्थ्य सेवाएं दो दिनों के लिए बड़े संकट में पड़ गई हैं, क्योंकि लगभग 3000 सरकारी डॉक्टर सोमवार और मंगलवार को हड़ताल पर चले गए हैं. डॉक्टरों ने ओपीडी, सर्जरी और यहां तक कि इमरजेंसी सेवाओं को भी बंद रखने का फैसला किया है, जिससे सरकारी अस्पतालों में गंभीर स्थिति बनने की आशंका है. यह हड़ताल विशेषज्ञ चिकित्सा अधिकारियों की सीधी भर्ती और संशोधित एसीपी ढांचे की अधिसूचना की मांग को लेकर की जा रही है.
असोसिएशन का कहना है कि सरकार ने इन मुद्दों पर 2024 में मंजूरी दी थी, लेकिन अभी तक औपचारिक आदेश जारी नहीं हुए हैं. असोसिएशन का यह भी कहना है कि एसएमओ पदों पर सीधी भर्ती से करियर प्रगति का रास्ता प्रभावित होगा और सेवा में काम कर रहे डॉक्टरों की सुरक्षा कम होगी. इससे पहले 27 नवंबर को दो घंटे की पेन डाउन हड़ताल की गई थी, लेकिन सरकार के साथ बातचीत में समाधान नहीं निकल सका था.
कई डॉक्टरों का कहना है कि सरकार को पहले एसीपी और पदोन्नति से जुड़े मुद्दे हल करने चाहिए. हड़ताल के चलते मरीजों पर भारी असर पड़ा है. कई मरीजों ने बताया कि वे निजी इलाज का खर्च नहीं उठा सकते और हर बार डॉक्टरों की हड़ताल से दवाओं और जांचों में देरी होती है. गुरुग्राम, फरीदाबाद, पंचकूला और रोहतक सहित कई जिलों के अस्पतालों में भीड़ और अव्यवस्था देखी गई. कई मरीजों को घर लौटना पड़ा, क्योंकि न डॉक्टर उपलब्ध थे और न ही उपचार.
हालांकि, डॉक्टरों का एक वर्ग इस आंदोलन से अलग हो गया है. इन डॉक्टरों ने ओपीडी सेवाएं देने का फैसला किया है और कहा है कि विशेषज्ञों की सीधी भर्ती रोकना राज्य के लिए नुकसानदेह होगा, क्योंकि 600 से अधिक पद खाली पड़े हैं. उनका कहना है कि यदि सीधी भर्ती रोकी गई तो विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी और बढ़ेगी और अस्पतालों में संकट गहरा जाएगा.
स्वास्थ्य विभाग ने हड़ताल से पहले सभी सिविल अस्पतालों में इमरजेंसी व्यवस्था लागू कर दी है. विभाग का कहना है कि मरीजों को पूरी तरह बिना इलाज के नहीं छोड़ा जाएगा. हालांकि, जमीनी हालात इसके विपरीत दिख रहे हैं और कई जिलों में स्वास्थ्य सेवाएं लगभग ठप हैं. सरकार और डॉक्टरों के बीच टकराव अभी भी जारी है और मरीज चिंतित हैं कि दो दिनों की यह हड़ताल कहीं लंबी न खिंच जाए.