दिल्ली में सर्दियों के दौरान प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए सरकार ने कई स्तरों पर तैयारियां शुरू कर दी हैं. प्रदूषण बढ़ने की आशंका के बीच 1 अक्टूबर से वाहनों के लिए नो PUC, नो फ्यूल व्यवस्था को सख्ती से लागू करने की तैयारी है.
दिल्ली में अब किसी भी पेट्रोल पंप पर वैध पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल प्रमाणपत्र नहीं होने पर वाहन को पेट्रोल पंप से ईंधन नहीं मिलेगा. दिल्ली में वाहनों के प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए PUC जांच और निगरानी पहले से ही सरकारी कार्ययोजना का हिस्सा है.
सरकार की इस व्यवस्था का सीधा असर उन वाहन मालिकों पर पड़ेगा, जिनके पास वैध PUC प्रमाणपत्र नहीं है. ईंधन भराने से पहले वाहन के प्रदूषण प्रमाणपत्र की जांच की जा सकती है. दिल्ली में PUC की निगरानी के लिए ANPR कैमरों और डिजिटल माध्यमों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है. सर्दियों में प्रदूषण की स्थिति बिगड़ने पर वाहनों और अन्य प्रदूषणकारी गतिविधियों पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगाने की व्यवस्था भी मौजूद है. ऐसे उपायों का उद्देश्य हवा में प्रदूषणकारी तत्वों के स्तर को नियंत्रित करना है.
सरकार की योजना के मुताबिक 1 नवंबर 2026 से 31 जनवरी 2027 तक धूल पैदा करने वाली तोड़फोड़ और बाहरी सिविल निर्माण गतिविधियों पर रोक लगाने का प्रावधान है. इसका मकसद सर्दियों में निर्माण कार्यों से होने वाले धूल प्रदूषण को सीमित करना है. इसके बाद 10 दिसंबर 2026 से 20 जनवरी 2027 के बीच निर्माण और तोड़फोड़ से जुड़ी गतिविधियों पर और कड़ी पाबंदी लागू करने की योजना है. दिल्ली में निर्माण और धूल प्रदूषण पर नियंत्रण पहले से ही शीतकालीन कार्ययोजनाओं का अहम हिस्सा रहा है.
प्रदूषण नियंत्रण उपायों के तहत 1 नवंबर से 28 फरवरी तक सरकारी और स्वायत्त संस्थानों के कार्यालय समय में बदलाव किया जाएगा. नगर निगम के अधीन आने वाले कार्यालय सुबह 8:30 बजे से शाम 5 बजे तक संचालित होंगे. वहीं दिल्ली सरकार के कार्यालयों का समय सुबह 10 बजे से शाम 6:30 बजे तक निर्धारित किया गया है. सरकार ने सरकारी और स्वायत्त कार्यालयों में 50 प्रतिशत कर्मचारियों के लिए वर्क फ्रॉम होम व्यवस्था लागू करने की भी घोषणा की है. इसके तहत आधे कर्मचारी घर से और बाकी कर्मचारी कार्यालय से काम करेंगे.