बंद होने जा रहा है 113 साल पुराना 'दिल्ली जिमखाना क्लब', केंद्र के फरमान पर भड़की 'आप'; कहा- अब अमीरों की बारी
केंद्र सरकार ने लुटियंस दिल्ली में स्थित ऐतिहासिक 'दिल्ली जिमखाना क्लब' को खाली करने का नोटिस जारी किया है. इस पर आम आदमी पार्टी के नेता सौरभ भारद्वाज ने तीखा हमला बोला है.
नई दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली के सबसे वीवीआईपी और पॉश इलाके लुटियंस जोन स्थित दिल्ली के सबसे प्रतिष्ठित और ऐतिहासिक 'दिल्ली जिमखाना क्लब' को केंद्र सरकार ने अपनी बेशकीमती जमीन खाली करने का नोटिस थमा दिया है. सरकार के इस बड़े कदम के बाद दिल्ली की सियासत में उबाल आ गया है. आम आदमी पार्टी (AAP) ने इस मुद्दे को लेकर भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है.
आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और मंत्री सौरभ भारद्वाज ने शनिवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला. उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार बिना किसी पुनर्वास व्यवस्था के एक-एक कर सबको उजाड़ने में लगी है. भारद्वाज ने कहा कि सत्ता में आने के बाद से इस सरकार ने केवल लोगों को विस्थापित करने का काम किया है, किसी को बसाने का नहीं. उन्होंने तंज कसा कि पहले गरीबों और दुकानदारों की बारी थी, और अब क्लब जाने वाले अमीरों और बड़े अफसरों का नंबर आया है.
27 एकड़ की जमीन खाली करने का आदेश
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के तहत आने वाले भूमि एवं विकास कार्यालय (L&DO) ने क्लब को एक आधिकारिक पत्र भेजा. इस नोटिस में दिल्ली जिमखाना क्लब को 2 सफदरजंग रोड पर स्थित अपनी 27.3 एकड़ की मुख्य संपत्ति को आगामी 5 जून तक पूरी तरह खाली करने का कड़ा निर्देश दिया गया है. सरकार ने इस ऐतिहासिक जमीन को वापस लेने के पीछे बेहद गंभीर और रणनीतिक वजहें बताई हैं.
सुरक्षा और रक्षा ढांचे का हवाला
भूमि एवं विकास कार्यालय द्वारा 22 मई को भेजे गए इस आधिकारिक पत्र में साफ कहा गया है कि यह विशिष्ट संपत्ति राष्ट्रीय राजधानी के एक अत्यंत संवेदनशील और रणनीतिक क्षेत्र के भीतर आती है. केंद्र सरकार के मुताबिक, देश के रक्षा ढांचे को मजबूत व सुरक्षित करने और अन्य महत्वपूर्ण सार्वजनिक हितों की परियोजनाओं के लिए इस जमीन की तत्काल और अनिवार्य आवश्यकता आन पड़ी है. प्रशासन ने चेतावनी दी है कि बात न मानने पर कानूनी तौर पर कब्जा लिया जाएगा.
कानूनी लड़ाई की तैयारी में क्लब
दूसरी तरफ, देश के इस सबसे रसूखदार क्लब के प्रबंधन ने सरकार के इस आदेश के खिलाफ देश की अदालत का दरवाजा खटखटाने का मन बना लिया है. क्लब के वरिष्ठ सदस्य सिद्धार्थ ने मीडिया को बताया कि यह क्लब देश की आजादी से भी पुराना है और इसके हजारों सम्मानित सदस्य हैं. उन्होंने सरकार के सुरक्षा खतरे के दावे को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि वे इस आदेश के खिलाफ कोर्ट में अपील करेंगे और न्यायपालिका इस पर अंतिम फैसला करेगी.
1913 का ऐतिहासिक ब्रिटिश इतिहास
गौरतलब है कि इस आलीशान क्लब की स्थापना ब्रिटिश काल के दौरान साल 1913 में 'इंपीरियल दिल्ली जिमखाना क्लब' के रूप में हुई थी. आजादी के बाद इसका नाम बदलकर दिल्ली जिमखाना क्लब कर दिया गया, जबकि इसके ज्यादातर मुख्य ढांचे 1930 के दशक में बने थे. इस क्लब के सदस्यों में देश के शीर्ष नौकरशाह, विदेशी राजनयिक, सैन्य अधिकारी, कैबिनेट मंत्री और देश के सबसे बड़े उद्योगपति शामिल हैं. हालांकि, यह क्लब पहले भी वित्तीय अनियमितताओं और पक्षपात के आरोपों के कारण विवादों में रहा है.