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India Daily

दिल्ली ब्लास्ट के बाद लापता हुआ अल-फलाह यूनिवर्सिटी का डॉ. हसन, जम्मू-कश्मीर सरकार ने 2023 में किया था बर्खास्त

दिल्ली लाल किला ब्लास्ट के बाद अलीगढ़ विश्वविद्यालय से जुड़े डॉक्टर निसार-उल-हसन लापता हो गए हैं. उन्हें 2023 में जम्मू-कश्मीर सरकार ने देशविरोधी गतिविधियों के आरोप में बर्खास्त किया था. जांच एजेंसियां अब डॉक्टरों के नेटवर्क की पड़ताल कर रही हैं.

Kuldeep Sharma
Edited By: Kuldeep Sharma
Dr Nisar ul Hassan india daily
Courtesy: social media

नई दिल्ली: दिल्ली के लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास 10 नवंबर को हुए कार ब्लास्ट ने सुरक्षा एजेंसियों को हिला दिया है. इस धमाके में 12 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई घायल हुए.

अब इस मामले में जम्मू-कश्मीर के पूर्व असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. निसार-उल-हसन के लापता होने से जांच और गहराई में चली गई है. डॉ. हसन पहले श्रीनगर के एसएमएचएस अस्पताल में कार्यरत थे और हाल ही में हरियाणा की अल-फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़े थे.

अल-फलाह यूनिवर्सिटी का बयान

डॉ. निसार-उल-हसन की गुमशुदगी की खबर सामने आने के बाद अल-फलाह यूनिवर्सिटी ने कहा है कि वह जांच एजेंसियों के साथ पूरी तरह सहयोग कर रही है. यूनिवर्सिटी के दिल्ली और फरीदाबाद कैंपस के अधिकारियों ने बताया कि अब तक किसी भी जांच टीम ने उनके परिसरों का दौरा नहीं किया है. यूनिवर्सिटी के ओखला कार्यालय के कर्मचारियों के अनुसार, प्रबंधन गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर स्थिति पर आधिकारिक बयान जारी करेगा.

लाल फोर्ड इको स्पोर्ट की तलाश तेज

इस बीच दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश की पुलिस एक रेड फोर्ड ईको स्पोर्ट कार की तलाश में जुटी है, जो हमले में इस्तेमाल की गई बताई जा रही है. गाड़ी का नंबर DL10CK0458 है और यह उमर उन नबी उर्फ डॉ. उमर मोहम्मद के नाम पर रजिस्टर्ड है. जांच में सामने आया है कि यह वाहन 2017 में फर्जी पते पर दिल्ली के राजौरी गार्डन आरटीओ से रजिस्टर्ड हुआ था. एजेंसियां ने आशंका जताई हैं कि कार में अब भी विस्फोटक या अहम सबूत मौजूद हो सकते हैं.

डॉक्टरों के नेटवर्क पर जांच

जांच एजेंसियों का मानना है कि डॉ. उमर, जो शायद ब्लास्ट वाली कार चला रहा था, एक आतंकी लॉजिस्टिक नेटवर्क का हिस्सा था, जिसमें नौ से दस लोग शामिल थे. इनमें कई डॉक्टर भी बताए जा रहे हैं. सूत्रों के मुताबिक, डॉ. उमर ने इस हमले की साजिश डॉ. मुझम्मिल और डॉ. शाहीन के साथ रची थी. इन दोनों को सोमवार को फरीदाबाद से 2,900 किलो विस्फोटक के साथ गिरफ्तार किया गया था. उनके पकड़े जाने के बाद डॉ. उमर ने यह हमला अकेले अंजाम दिया.

डीएनए और मोबाइल डेटा से सुराग तलाश

पुलिस अब लाल किला क्षेत्र के मोबाइल टावर डेटा का विश्लेषण कर रही है ताकि यह पता चल सके कि घटना के दिन शाम 3 बजे से 6:30 बजे के बीच डॉ. उमर ने किन लोगों से संपर्क किया था. साथ ही, उनके परिवार से लिए गए डीएनए सैंपल्स की तुलना ब्लास्ट साइट से मिले वायोलॉजिकल एवीडेंस से की जा रही है ताकि पुष्टि हो सके कि कार ड्राइवर वही थे या नहीं.

संदेह और सतर्कता दोनों बढ़ी

डॉ. निसार-उल-हसन के लापता होने और डॉक्टरों के नेटवर्क की भूमिका सामने आने के बाद एजेंसियां बेहद सतर्क हैं. राजधानी और आसपास के राज्यों में हाई अलर्ट जारी किया गया है. जांचकर्ता मान रहे हैं कि यह नेटवर्क न केवल दिल्ली बल्कि देश के कई हिस्सों में सक्रिय हो सकता है.