कॉकरोच मास्क पहनकर जंतर-मंतर पर उतरे युवा, अभिजीत दिपके के नेतृत्व में CJP प्रदर्शन ने उठाई 5 मांगें
नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में हुए विरोध प्रदर्शन में युवाओं ने शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को उठाया. प्रदर्शनकारियों ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे समेत पांच प्रमुख मांगों को लेकर आवाज बुलंद की.
राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर शुक्रवार को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बैनर तले बड़ा विरोध प्रदर्शन देखने को मिला. पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके की अगुवाई में हुए इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में छात्र, युवा पेशेवर और अभिभावक शामिल हुए. प्रदर्शन का मुख्य केंद्र शिक्षा व्यवस्था में कथित गड़बड़ियां और परीक्षा प्रणाली से जुड़े विवाद रहे. कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे सहित कई अहम मांगों को लेकर अपनी आवाज उठाई.
जंतर-मंतर पर युवाओं की बड़ी भागीदारी
सुबह से ही जंतर-मंतर के आसपास छात्रों और युवाओं की भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी. कई प्रदर्शनकारी कॉकरोच के प्रतीक वाले मास्क पहनकर पहुंचे. कुछ लोग हाथों में फूल और तख्तियां लिए दिखाई दिए. माहौल पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा लेकिन नारों और भाषणों के जरिए प्रदर्शनकारियों ने अपनी नाराजगी साफ जाहिर की. अभिजीत दिपके ने भी मंच से संबोधित करते हुए कहा कि यह लड़ाई सिर्फ एक व्यक्ति के खिलाफ नहीं बल्कि शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय कराने की कोशिश है. प्रदर्शन में शामिल युवाओं का कहना था कि उनकी चिंताओं को लंबे समय से नजरअंदाज किया जा रहा है.
शिक्षा मंत्री का इस्तीफा और जवाबदेही
प्रदर्शन की सबसे बड़ी मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की रही. प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि परीक्षा और भर्ती प्रक्रियाओं से जुड़े विवादों पर पर्याप्त जवाबदेही तय नहीं की गई. मंच से लगातार ऐसे नारे सुनाई दिए जिनमें इस्तीफे की मांग दोहराई गई. प्रदर्शन में मौजूद कई छात्रों का कहना था कि शिक्षा व्यवस्था में विश्वास बहाल करने के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई जरूरी है.
डिजिटल शिक्षा और परीक्षा प्रणाली पर उठे सवाल
प्रदर्शन के दौरान शिक्षा में तेजी से बढ़ते डिजिटलीकरण को भी चर्चा का बड़ा विषय बनाया गया. कई अभिभावकों और शिक्षकों ने कहा कि डिजिटल व्यवस्था लागू करने से पहले पर्याप्त प्रशिक्षण और तैयारी जरूरी है. प्रदर्शनकारियों का तर्क था कि तकनीक का इस्तेमाल जरूरी है. वहीं उसके साथ पारदर्शिता और सुरक्षा भी उतनी ही अहम है. इसी के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं में निष्पक्षता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने की मांग भी उठी. कई लोगों ने परीक्षा लीक जैसे मामलों पर चिंता जताते हुए मजबूत व्यवस्था की जरूरत बताई.
मानसिक स्वास्थ्य और मणिपुर के छात्रों का मुद्दा
विरोध प्रदर्शन में छात्रों की मानसिक सेहत का मुद्दा भी प्रमुखता से सामने आया. प्रदर्शनकारियों का कहना था कि लगातार परीक्षा दबाव, अनिश्चितता और विवादों का असर लाखों छात्रों पर पड़ रहा है. इसके अलावा मणिपुर में शिक्षा व्यवस्था के सामान्य संचालन की मांग भी रखी गई. प्रदर्शन में शामिल लोगों ने कहा कि वहां के छात्रों को लंबे समय से मुश्किल हालात का सामना करना पड़ रहा है. आंदोलनकारियों का मानना है कि शिक्षा से जुड़े हर फैसले में छात्रों और अभिभावकों की चिंताओं को प्राथमिकता मिलनी चाहिए.