दिल्ली में 21 से 23 मई तक ट्रांसपोर्टर्स का चक्का जाम, ECC शुल्क बढ़ोतरी और BS-4 प्रतिबंध के खिलाफ हड़ताल

दिल्ली में ट्रांसपोर्टर्स ने 21 से 23 मई तक चक्का जाम का ऐलान किया है. ECC शुल्क बढ़ोतरी और BS-4 कमर्शियल वाहनों पर प्रस्तावित प्रतिबंध के खिलाफ 70 से ज्यादा ट्रांसपोर्ट यूनियनें हड़ताल करेंगी. इससे जरूरी सामानों की सप्लाई और महंगाई पर असर पड़ सकता है.

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Dhiraj Kumar Dhillon

दिल्ली सरकार और वायु गुणवत्ता प्रबंधन की नीतियों पर भड़के ट्रांसपोर्टर्स ने तीन दिन तक चक्का जाम रखने का ऐलान किया है. मिडिल-ईस्ट तनाव के चलते जहां तेल कीमतें बढ़ने से आम उपभोक्ताओं पर पहले से महंगाई की मार पड़ रही है, वहीं तीन दिन तक आपूर्ति ठप होने से मुश्किलें और बढ़ सकती हैं. ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट ‌कांग्रेस (AIMTC) की अगुवाई में करीब 70 ट्रांसपोर्टर्स एसोसिएशन और यूनियन 21 से 23 मई तक चक्का जाम रखेंगी. दरअसल यूनियनों की नाराजगी पर्यावरण क्षतिपूर्ति शुल्क (ईसीसी) में बढोतरी और बीएस-4 कमर्शियल वाहनों प्रतिबंध लगाने के प्रस्ताव पर है. यूनियनों का कहना है कि दिल्ली सरकार और सीएक्यूएम की नीतियों के चलते ट्रांसपोर्टर्स पर आर्थिक संकट के बादल मंडराने लगे हैं.

ईसीसी शुल्क में बढोतरी से नाराज हैं ट्रांसपोर्टर्स

एआईएमटीसी प्रमुख डॉ. हरीश अग्रवाल ने कहा कि दिल्ली में आने वाले सभी कमर्शियल वाहनों पर एक झटके में ह‌ी ईसीसी शुल्क में भारी बढोतरी कर दी गई. उन्होंने कहा कि हल्के वाहनों पर पहले 1400 रुपये का शुल्क लगता था, जिसे बढ़ाकर 2000 रुपये कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि भारी वाहनों का ईसीसी शुल्क 2600 से बढ़ाकर सीधे 4000 रुपये कर दिया गया। एक झटके में 50 प्रतिशत से अधिक बढोतरी ने ट्रांसपोर्टर्स की कमर तोड़कर रख दी है.

ट्रांजिट वाहनों पर लगाएं अधिक शुल्क

ट्रांसपोर्टर्स का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट की मंशा उन वाहनों पर सख्ती करने की थी जो दिल्ली को एक कॉरिडोर के तौर पर इस्तेमाल करते हैं, यानी दिल्ली से होकर अपने गंतव्यों की ओर से जाते हैं. आरोप है कि दिल्ली सरकार की गलत नीतियों का शिकार वो वाहन हो रहे हैं जो दिल्ली के लिए आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति करते हैं. इन सभी वाहनों पर पहले ईसीसी शुल्क नहीं लगाया जाता है.