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दिल्ली दंगा मामला: उमर खालिद ने जमानत देने से इनकार के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की पुनर्विचार याचिका

2020 दिल्ली दंगों से जुड़े मामले में उमर खालिद ने सुप्रीम कोर्ट में जमानत से इनकार के फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दाखिल की है, जिस पर 16 अप्रैल को विचार संभव है.

Sagar
Edited By: Sagar Bhardwaj
दिल्ली दंगा मामला: उमर खालिद ने जमानत देने से इनकार के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की पुनर्विचार याचिका
Courtesy: pinterest

2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े कथित साजिश मामले में आरोपी पूर्व जेएनयू छात्र नेता उमर खालिद ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा एक बार फिर खटखटाया है. जमानत से इनकार किए जाने के फैसले के खिलाफ उन्होंने पुनर्विचार याचिका दायर की है. इस याचिका में उन्होंने अदालत से अपने मामले पर दोबारा विचार करने की अपील की है. इस घटनाक्रम ने एक बार फिर इस बहुचर्चित मामले को सुर्खियों में ला दिया है और कानूनी बहस को नया मोड़ दिया है.

पुनर्विचार याचिका की मांग

उमर खालिद की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट की पीठ के सामने यह मामला रखा. उन्होंने न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति एन. वी. अंजारिया से आग्रह किया कि इस याचिका को खुले कोर्ट में सुना जाए. सिब्बल ने बताया कि फिलहाल यह याचिका 16 अप्रैल को जजों के चेंबर में विचार के लिए सूचीबद्ध है. उन्होंने यह भी कहा कि एक अलग आवेदन दाखिल कर खुले कोर्ट में सुनवाई की मांग की गई है, ताकि मामले की पारदर्शिता बनी रहे.

सुप्रीम कोर्ट का रुख

पीठ ने इस पर तत्काल कोई आदेश नहीं दिया, लेकिन कहा कि वह दस्तावेजों का अध्ययन करेगी और आवश्यकता होने पर आगे का निर्णय लेगी. सुप्रीम कोर्ट के नियमों के अनुसार, पुनर्विचार याचिकाएं आमतौर पर उसी पीठ द्वारा चेंबर में सुनी जाती हैं, जिसने मूल फैसला दिया था. इसका उद्देश्य यह देखना होता है कि कहीं फैसले में कोई स्पष्ट त्रुटि या गंभीर अन्याय तो नहीं हुआ है. ऐसे मामलों में अदालत बहुत सावधानी से हर पहलू पर विचार करती है.

पहले क्या कहा था अदालत ने

इससे पहले 5 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका खारिज कर दी थी. अदालत ने कहा था कि दोनों की भूमिका अन्य आरोपियों से अलग और अधिक गंभीर प्रतीत होती है. वहीं, इसी मामले में पांच अन्य आरोपियों गुलफिशा फातिमा, मीरा हैदर, शिफा उर रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद को राहत देते हुए जमानत दी गई थी. अदालत ने इन सभी के मामलों में स्पष्ट अंतर बताया था.

यह मामला 2020 के दिल्ली दंगों की कथित साजिश से जुड़ा है, जिसने देशभर में व्यापक चर्चा को जन्म दिया था. अब पुनर्विचार याचिका के जरिए उमर खालिद एक बार फिर अदालत से राहत की उम्मीद कर रहे हैं. आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सुप्रीम कोर्ट इस याचिका पर क्या रुख अपनाता है. यदि खुली अदालत में सुनवाई होती है, तो यह मामला और अधिक सार्वजनिक बहस का विषय बन सकता है.