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PWD का बड़ा फैसला, अब दिल्ली की सड़कों पर लगेगा QR कोड वाला साइन बोर्ड; जानें इसका फायदा

दिल्ली पीडब्ल्यूडी ने सभी नए रोड साइन पर क्यूआर कोड अनिवार्य कर दिए हैं. क्यूआर कोड से निर्माता, सामग्री और वारंटी की जानकारी मिलेगी. आगे चलकर इन्हें पीडब्ल्यूडी सेवा ऐप से जोड़कर शिकायत दर्ज करने की सुविधा भी दी जाएगी.

Km Jaya
Edited By: Km Jaya
PWD का बड़ा फैसला, अब दिल्ली की सड़कों पर लगेगा QR कोड वाला साइन बोर्ड; जानें इसका फायदा
Courtesy: Pinterest

नई दिल्ली: दिल्ली में सड़क सुरक्षा और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए लोक निर्माण विभाग यानी PWD ने सड़क संकेतकों पर क्यूआर कोड अनिवार्य कर दिए हैं. यह निर्देश 1 जनवरी को जारी नई गाइडलाइंस के तहत लागू किया गया है. अब पीडब्ल्यूडी की सड़कों पर लगने वाले सभी नए रोड साइन में क्यूआर कोड शामिल करना जरूरी होगा. 

इन क्यूआर कोड को स्कैन करने पर नागरिकों को इसमें निर्माता का नाम, मैन्युफैक्चरिंग डेट, रिफ्लेक्टिव शीटिंग कोड और वारंटी की जानकारी दर्ज होगी. पीडब्ल्यूडी के आदेश में कहा गया है कि सभी रेट्रो रिफ्लेक्टिव साइन में क्यूआर कोड होना चाहिए. यह क्यूआर कोड संकेतक के निचले दाएं कोने में लगाया जाएगा. विभाग का मानना है कि इससे सड़क संकेतकों की गुणवत्ता पर नजर रखना आसान होगा और खराब काम की पहचान भी तुरंत हो सकेगी.

टेंडर प्रक्रिया में क्या हुआ बदलाव?

नई व्यवस्था के तहत टेंडर प्रक्रिया में भी बदलाव किया गया है. अब किसी भी नए टेंडर में यह शर्त शामिल होगी कि रोड साइन पर क्यूआर कोड लगाना अनिवार्य होगा. पीडब्ल्यूडी अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे इस शर्त का सख्ती से पालन कराएं. विभाग का उद्देश्य है कि दिल्ली की सड़कों पर लगे सभी संकेतक एक जैसे दिखें और रात में भी साफ नजर आएं.

अधिकारियों ने क्या बताया?

अधिकारियों ने बताया कि आने वाले समय में इन क्यूआर कोड को पीडब्ल्यूडी सेवा मोबाइल ऐप से जोड़ा जाएगा. इसके बाद लोग क्यूआर कोड स्कैन कर सड़क, गड्ढों, स्ट्रीटलाइट या संकेतकों से जुड़ी शिकायत सीधे दर्ज कर सकेंगे. पहले चरण में सामान्य क्यूआर कोड लगाए जाएंगे. बाद में शिकायत दर्ज करने की सुविधा भी जोड़ी जाएगी.

गाइडलाइंस में और क्या बताया गया?

गाइडलाइंस में यह भी स्पष्ट किया गया है कि क्यूआर कोड लगाने का काम ओईएम, ओईएम का अधिकृत कन्वर्टर या कोई अन्य एजेंसी कर सकती है. अगर बोली लगाने वाली कंपनी ओईएम है तो उसे साइट पर काम करने वाले व्यक्ति के लिए प्रमाण पत्र और अनुमति पत्र देना होगा. 

रेट्रो रिफ्लेक्टिव शीटिंग की वारंटी अवधि इंस्टॉलेशन की तारीख से दस साल होगी. इस अवधि में किसी भी खराबी पर मुफ्त में बदलाव करना होगा.

पीडब्ल्यूडी ने क्यों उठाया यह कदम?

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने साल 2024 की ऑडिट रिपोर्ट में दिल्ली में सड़क संकेतकों की एकरूपता की कमी पर सवाल उठाए थे. रिपोर्ट में कहा गया था कि अलग अलग एजेंसियों के कारण संकेतकों के रंग और आकार में अंतर है. पीडब्ल्यूडी का यह कदम उसी समस्या को दूर करने की दिशा में अहम माना जा रहा है.