केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने गुरुवार को दिल्ली मास्टर प्लान 2047 का खाका पेश किया. योजना का उद्देश्य बढ़ती आबादी के साथ राजधानी के बुनियादी ढांचे और शहरी व्यवस्था को आधुनिक बनाना है. इसमें आवास, परिवहन, भूमि प्रबंधन और निर्माण से जुड़ी प्रक्रियाओं में बड़े बदलाव प्रस्तावित किए गए हैं. सरकार का जोर खास तौर पर किफायती आवास और बेहतर सार्वजनिक परिवहन पर रहेगा.
दिल्ली में आवास की बढ़ती जरूरत को पूरा करने के लिए मास्टर प्लान में करीब 40 लाख नए फ्लैट जोड़ने का प्रस्ताव है. इनमें बड़ी संख्या किफायती आवास की होगी, ताकि मध्यम और सामान्य आय वर्ग के लोगों को राहत मिल सके. इसके अलावा राजधानी में 50 साल से अधिक पुराने और जर्जर आवासीय परिसरों के पुनर्विकास पर भी जोर दिया जाएगा. इससे पुराने इलाकों को आधुनिक सुविधाओं के साथ नया स्वरूप मिलने की उम्मीद है.
दिल्ली की लाइफलाइन मानी जाने वाली मेट्रो को भी मास्टर प्लान में बड़ा विस्तार मिलने वाला है. मौजूदा करीब 416 किलोमीटर लंबे नेटवर्क को बढ़ाकर 695 किलोमीटर तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है. इससे दिल्ली के साथ आसपास के इलाकों की कनेक्टिविटी मजबूत होगी. सार्वजनिक परिवहन का दायरा बढ़ने से सड़कों पर वाहनों का दबाव और ट्रैफिक जाम कम करने में भी मदद मिलने की उम्मीद है.
मेट्रो के साथ रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम यानी RRTS को भी विस्तार देने की योजना है. वर्तमान में एक RRTS कॉरिडोर परिचालन में है, जबकि छह नए रूट के लिए समझौतों की दिशा में काम चल रहा है. इन कॉरिडोर के विकसित होने से दिल्ली और आसपास के शहरों के बीच तेज और सुविधाजनक आवाजाही के विकल्प बढ़ेंगे. क्षेत्रीय परिवहन नेटवर्क मजबूत करना योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है.
मास्टर प्लान में सराय काले खां, आनंद विहार और कश्मीरी गेट जैसे प्रमुख परिवहन केंद्रों को और विकसित करने का प्रस्ताव है. इन ट्रांजिट हब पर अलग-अलग परिवहन माध्यमों के बीच बेहतर तालमेल और कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने पर जोर होगा. इसके साथ ही भूमि पूलिंग, नए परिवहन कॉरिडोर और TDR जैसी व्यवस्थाओं के जरिए शहरी विकास को गति देने की योजना है.
निर्माण परियोजनाओं की मंजूरी प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए सिंगल विंडो सिस्टम लागू करने पर भी जोर दिया गया है. अभी बड़े प्रोजेक्ट के लिए अलग-अलग विभागों से अनुमति लेने में काफी समय लग सकता है. एकीकृत व्यवस्था से आवेदन और मंजूरी की प्रक्रिया एक ही स्थान पर पूरी करने का लक्ष्य है. सरकार के मुताबिक इससे दफ्तरों के चक्कर कम होंगे और परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाया जा सकेगा.