दिवाली के अगले दिन 'गंभीर' स्तर पर थी दिल्ली की वायु गुणवत्ता, ज्यादातर AQI मॉनिटरिंग सेंटर रहे बंद, डेटा गायब
दिवाली की रात दिल्ली की हवा 'गंभीर' स्तर पर थी, लेकिन मॉनिटरिंग सिस्टम की नाकामी ने असली आंकड़ों को छिपा दिया. अब सवाल उठ रहा है कि जब दिल्ली की हवा इतनी जहरीली हो रही है, तो क्या सरकार और एजेंसियां सच बताने से भी डर रही हैं?
नई दिल्ली: दिवाली के अगले दिन राजधानी दिल्ली की हवा कितनी जहरीली थी, इसका असली सच अब सामने आ गया है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिवाली की रात और अगले दिन सुबह के प्रदूषण के चरम घंटों के दौरान दिल्ली के अधिकांश वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्रों ने डेटा रिकॉर्ड करना बंद कर दिया था. नतीजा यह हुआ कि आधिकारिक तौर पर दर्ज किया गया औसत AQI वास्तविक स्थिति से काफी अलग दिखाई दिया.
जानकारी के अनुसार, दिल्ली के 39 में से सिर्फ 8 केंद्रों ने दिवाली की रात और उसके बाद की सुबह को कवर करते हुए मंगलवार शाम 4 बजे तक के 24 घंटों के लिए निर्बाध रूप से प्रति घंटा डेटा रिकॉर्ड किया. इन्हीं केंद्रों के आधार पर दिवाली के अगले दिन यानी 21 अक्टूबर का औसत AQI निकाला गया.
जब प्रदूषण अपने चरम पर, तब का डेटा गायब
प्रति घंटा AQI डेटा में अंतराल कोई नई बात नहीं है, लेकिन इस बार डेटा का गायब होना अभूतपूर्व था. कुल 31 केंद्रों पर लगभग 173 घंटे का डेटा उपलब्ध नहीं था, जिसमें से करीब 163 घंटे वही थे जब प्रदूषण अपने चरम पर था. यह आंकड़े केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) की वेबसाइट से लिए गए हैं.
‘वायु आपातकाल’ जैसे हालात
CPCB के आंकड़ों के मुताबिक, दिवाली की रात 10 बजे तक दिल्ली की औसत वायु गुणवत्ता ‘गंभीर’ श्रेणी (AQI 400 से ऊपर) में पहुंच गई थी और यह स्थिति अगले 13 घंटे तक बनी रही. रात 10 बजे जब हवा पहली बार ‘गंभीर’ स्तर पर पहुंची, उस समय सभी 39 स्टेशन काम कर रहे थे. लेकिन रात 1 बजे तक, जब औसत AQI 489 तक पहुंच गया, जो ‘वायु आपातकाल’ स्तर माना जाता है, तब केवल 19 स्टेशन ही चालू थे. सुबह 3 बजे तक यह संख्या घटकर मात्र 12 रह गई.
असल AQI ‘बहुत खराब’ नहीं, ‘गंभीर’ था
टाइम्स ऑफ इंडिया के विश्लेषण के अनुसार, यदि सभी केंद्रों ने डेटा रिकॉर्ड किया होता, तो दिवाली के अगले दिन औसत AQI 380 से ऊपर जाता, यानी ‘गंभीर’ श्रेणी में आता. कई केंद्रों ने दिवाली की रात 500 तक का AQI दर्ज किया, जो पैमाने का सबसे ऊपरी स्तर है. ऐसे में संभावना है कि वास्तविक प्रदूषण स्तर आधिकारिक आंकड़े 351 (बहुत खराब) से कहीं ज्यादा रहा हो.
मंत्री ने किया दावा– कोई डेटा गायब नहीं
हालांकि 22 अक्टूबर की रात से ही कई मीडिया रिपोर्टों में डेटा गायब होने की बात सामने आने लगी थी, लेकिन दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने इसे खारिज करते हुए कहा कि CPCB और DPCC पर सभी डेटा उपलब्ध हैं, कोई डेटा गायब नहीं है.' इसके बावजूद, पांच दिन बाद भी CPCB की वेबसाइट पर कई स्टेशनों का डेटा अनुपलब्ध दिखा.
पटाखों पर पाबंदी बेअसर
सुप्रीम कोर्ट द्वारा हरित पटाखों और सीमित समय में आतिशबाजी के निर्देश के बावजूद दिल्ली-एनसीआर में लोगों ने देर रात तक पारंपरिक पटाखे जलाए. नतीजा यह हुआ कि हवा में जहर घुल गया और प्रदूषण स्तर कई गुना बढ़ गया.
दिल्ली-एनसीआर के लोग बीमार
सामुदायिक मंच लोकलसर्किल्स द्वारा दिल्ली, गुरुग्राम, नोएडा, फरीदाबाद और गाजियाबाद के 44,000 लोगों पर किए गए सर्वेक्षण में पाया गया कि चार में से तीन परिवारों ने प्रदूषण के प्रत्यक्ष प्रभाव महसूस किए.
- 42% लोगों ने गले में खराश या खांसी की शिकायत की.
- 25% ने आंखों में जलन या सिरदर्द बताया.
- 17% को सांस लेने में तकलीफ या अस्थमा के दौरे पड़े.
- 17% ने बहती नाक, जकड़न या चिंता की समस्या बताई.
एयर प्यूरीफायर की मांग बढ़ी
इस बीच, दिल्ली-एनसीआर में एयर प्यूरीफायर की बिक्री में एक बार फिर उछाल देखा गया है. इलेक्ट्रॉनिक रिटेल स्टोर्स ने बताया कि पिछले कुछ दिनों में ग्राहकों की संख्या और वायु शोधक उपकरणों की पूछताछ, दोनों तेजी से बढ़ी हैं.