केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी की बेटी हिमयानी को हाईकोर्ट से बड़ी राहत, सोशल मीडिया से एपस्टीन कनेक्शन वाली पोस्ट हटाने का दिया आदेश
दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी की बेटी हिमयानी पुरी को अंतरिम राहत देते हुए जेफरी एपस्टीन से जोड़ने वाली सोशल मीडिया पोस्ट्स और कंटेंट को तुरंत हटाने का आदेश दिया है. कोर्ट ने प्रथम दृष्टया मामला उनके पक्ष में पाया और कहा कि अगर कंटेंट नहीं हटाया गया तो प्लेटफॉर्म्स को 24 घंटे में कार्रवाई करनी होगी.
नई दिल्ली: केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी की बेटी हिमयानी पुरी ने दिल्ली हाईकोर्ट में मानहानि का मुकदमा दायर किया था, जिसमें उन्होंने जेफरी एपस्टीन जैसे दोषी अपराधी से अपने कथित संबंध दिखाने वाली ऑनलाइन सामग्री को हटाने की मांग की थी. मंगलवार को कोर्ट ने उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए अंतरिम आदेश जारी किया है. कोर्ट ने माना कि यह सामग्री उनकी छवि को गंभीर नुकसान पहुंचा रही है और प्रथम दृष्टया मामला उनके पक्ष में बनता है. हिमयानी न्यूयॉर्क में वित्तीय क्षेत्र में काम करती हैं और वैश्विक स्तर पर अपनी प्रतिष्ठा बचाने की कोशिश कर रही हैं. हालांकि, कोर्ट ने अभी केवल भारत में कंटेंट हटाने का निर्देश दिया है.
अंतरिम राहत का आदेश
दिल्ली हाईकोर्ट ने हिमयानी पुरी की याचिका पर तुरंत प्रभाव से सभी चिह्नित सामग्री को हटाने का आदेश दिया. अगर कोई यूजर या प्लेटफॉर्म इसे नहीं हटाता, तो मध्यस्थ प्लेटफॉर्म्स को 24 घंटे के अंदर कार्रवाई करनी होगी. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह आदेश केवल भारत क्षेत्र में लागू होगा.
प्रथम दृष्टया मामला और संतुलन
कोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता के पक्ष में प्रथम दृष्टया मामला बनता है. सुविधा का संतुलन भी उनके पक्ष में है. अगर राहत नहीं दी गई तो उन्हें अपूरणीय क्षति हो सकती है. इसलिए अंतरिम आदेश जरूरी था. कोर्ट ने सभी पक्षों को दो हफ्ते में जवाब दाखिल करने को कहा.
याचिकाकर्ता की दलीलें
हिमयानी के वकील ने कहा कि यह सामग्री एक सुनियोजित हमला है, जिसका मकसद उनकी छवि खराब करना है. उन्होंने जोर दिया कि एपस्टीन से उनका कोई संबंध नहीं है. मंत्री की बेटी होने के कारण राजनीतिक दुर्भावना से हमला हो रहा है. न्यूयॉर्क में बैंकिंग और निवेश के क्षेत्र में काम करने से वैश्विक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है.
प्लेटफॉर्म्स और अन्य पक्षों की आपत्ति
मेटा जैसे प्लेटफॉर्म्स ने ग्लोबल टेकडाउन पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि भारतीय कोर्ट का आदेश वैश्विक स्तर पर लागू नहीं हो सकता. कुछ पत्रकारों ने दावा किया कि पोस्ट्स में केवल सवाल उठाए गए हैं और पत्रकारिता की आजादी प्रभावित न हो. कोर्ट ने ग्लोबल मुद्दे को खुला रखा और बाद में सुनवाई का संकेत दिया.
आगे की सुनवाई
कोर्ट ने सभी डिफेंडेंट्स को समन जारी किया और जवाब मांगा. ग्लोबल टेकडाउन का सवाल एक डिवीजन बेंच के सामने लंबित है, इसलिए फिलहाल केवल भारतीय क्षेत्र तक सीमित राहत दी गई. मामले की गहराई से जांच के बाद अंतिम फैसला होगा.
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