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कोर्ट से क्लीन चिट के बाद अरविंद केजरीवाल फिर जंतर-मंतर पर भरेंगे हुंकार

राउज एवेन्यू कोर्ट ने कथित आबकारी नीति मामले में केजरीवाल, मनीष सिसोदिया समेत सभी 23 आरोपियों को पूरी तरह डिस्चार्ज कर दिया है.

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Sagar Bhardwaj

दिल्ली का जंतर-मंतर एक बार फिर बड़ी राजनीतिक गूंज का केंद्र बनने जा रहा है. रविवार, 1 मार्च को सुबह 11 बजे आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल विशाल सभा को संबोधित करेंगे. यह सभा सिर्फ एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं मानी जा रही, बल्कि उस फैसले के बाद जनता के बीच पहला बड़ा संदेश होगी जिसमें राउज एवेन्यू कोर्ट ने कथित आबकारी नीति मामले में केजरीवाल, मनीष सिसोदिया समेत सभी 23 आरोपियों को पूरी तरह डिस्चार्ज कर दिया.

कोर्ट ने साफ कहा कि कोई व्यापक साजिश नहीं थी, कोई आपराधिक इरादा नहीं था और कोई प्रथम दृष्टया मामला नहीं बनता. इतना ही नहीं, जांच को “पूर्व नियोजित और साजिशपूर्ण” तक बताया गया. इस फैसले के बाद आम आदमी पार्टी और उसके समर्थकों में एक नई ऊर्जा दिखाई दे रही है. पार्टी इसे सच्चाई और ईमानदारी की जीत बता रही है.

कोर्ट से बाहर निकलते हुए अरविंद केजरीवाल ने भावुक होकर कहा, “मैं कट्टर ईमानदार हूँ. मैंने जिंदगी में सिर्फ ईमानदारी कमाई है.” यह बयान अब आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच एक विश्वास का प्रतीक बन गया है. पार्टी का कहना है कि झूठे आरोपों के बावजूद केजरीवाल डटे रहे और आज पहले से ज्यादा मजबूत होकर सामने आए हैं.

आम आदमी पार्टी दिल्ली के अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने कहा कि रविवार की सभा ऐतिहासिक होगी. उन्होंने बताया कि सुबह 11 बजे जंतर-मंतर पर पूरी राष्ट्रीय लीडरशिप मौजूद रहेगी, चाहे वह गुजरात, गोवा, पंजाब या दिल्ली के नेता हों. उन्होंने भरोसा जताया कि इस सभा से जो आवाज उठेगी, वह पूरे देश तक पहुंचेगी.

पार्टी का मानना है कि यह सिर्फ कानूनी जीत नहीं, बल्कि नैतिक जीत भी है. समर्थकों के बीच यह भावना है कि ईमानदारी को दबाया नहीं जा सकता. दिल्ली में मुफ्त बिजली-पानी, बेहतर सरकारी स्कूल और मोहल्ला क्लिनिक जैसे कामों को लोग केजरीवाल की नीयत और सोच का उदाहरण मानते हैं.

अब सबकी नजरें जंतर-मंतर की उस सभा पर हैं, जहां अरविंद केजरीवाल अपनी बात देश के सामने रखेंगे. आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता इसे नई शुरुआत मान रहे हैं. उनके मुताबिक यह रैली सिर्फ दिल्ली की नहीं, बल्कि पूरे देश में एक संदेश देने वाली होगी कि संघर्ष के बाद भी अगर कोई नेता मजबूती से खड़ा है, तो वह कट्टर ईमानदारी के भरोसे पर खड़ा है.