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India Daily

छत्तीसगढ़ में दो पाकिस्तानी गिरफ्तार, फर्जी वोटर ID बनवाकर कर रहे थे गड़बड़ी; सुरक्षा एजेंसियां हुईं अलर्ट

रायगढ़ जिले में अवैध विदेशियों की पहचान करने के लिए अभियान के दौरान पुलिस को सूचना मिली कि इफ्तिखार और अर्निश याकूब शेख के घर पर रह रहे हैं. पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दोनों को पकड़ लिया.

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Edited By: Anvi Shukla
छत्तीसगढ़ में दो पाकिस्तानी गिरफ्तार, फर्जी वोटर ID बनवाकर कर रहे थे गड़बड़ी; सुरक्षा एजेंसियां हुईं अलर्ट
Courtesy: social media

Chattisgarh Pakistani Nationals: छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में दो पाकिस्तानी नागरिक पकड़े गए. उन पर आरोप है कि उन्होंने गलत जानकारी देकर भारतीय वोटर पहचान पत्र और अन्य दस्तावेज प्राप्त किए थे. पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार किए गए आरोपियों का नाम इफ्तिखार शेख (29) और अर्निश शेख (25) है, जो पाकिस्तान के कराची के रहने वाले हैं. इन दोनों के पास वैध पाकिस्तानी पासपोर्ट और लॉन्ग टर्म वीजा (LTV) हैं.

पुलिस के बयान के मुताबिक, दोनों आरोपी वर्तमान में कोडातराई गांव में रहते थे, जो जूटमिल पुलिस स्टेशन के क्षेत्र में आता है. रायगढ़ जिले में अवैध विदेशियों की पहचान करने के लिए चलाए जा रहे अभियान के दौरान पुलिस को जानकारी मिली कि इफ्तिखार और अर्निश शेख एक व्यक्ति, याकूब शेख के घर पर रह रहे हैं. 

फर्जी दस्तावेज बनाने का मामला

पुलिस की जांच में पता चला कि अर्निश और इफ्तिखार ने भारतीय दस्तावेज़, जैसे मतदाता पहचान पत्र, धोखाधड़ी से प्राप्त किए थे. उन्होंने संबंधित अधिकारियों को झूठी जानकारी दी थी, जिससे वे यह दस्तावेज़ हासिल करने में सफल रहे. पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ कई धाराओं में केस दर्ज किया. इनमें धारा 199 (झूठा बयान देना), 200 (झूठे बयान का उपयोग करना), 419 (धोखाधड़ी), 467 (महत्वपूर्ण सुरक्षा या वसीयत की जालसाजी), 468 (धोखाधड़ी के उद्देश्य से जालसाजी), और 34 (साझा इरादा) शामिल हैं. 

जांच जारी है

पुलिस ने कहा कि इस मामले में आगे की जांच जारी है. इसके अलावा, यह कार्रवाई उस दिन हुई जब भारतीय सरकार द्वारा पाकिस्तानी नागरिकों के लिए 12 श्रेणियों के शॉर्ट-टर्म वीजा की समाप्ति की समयसीमा खत्म हो गई थी. सरकार ने इस निर्णय के बाद पाकिस्तान के नागरिकों के वीजा रद्द कर दिए थे. यह निर्णय 26 पर्यटकों के कश्मीर के पहलगाम में आतंकवादी हमले में मारे जाने के बाद लिया गया था.

पुलिस की यह कार्रवाई यह साबित करती है कि भारत में अवैध रूप से रहने वाले विदेशी नागरिकों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जा रहे हैं. इसके माध्यम से भारतीय दस्तावेज़ों के दुरुपयोग को भी रोकने का प्रयास किया जा रहा है.