रायपुर: भारत में दशकों से जारी नक्सलवाद की समस्या अब अपने अंतिम पड़ाव पर नजर आ रही है. छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने एक बड़ी सामरिक सफलता की घोषणा करते हुए बताया कि माओवादियों के सबसे खूंखार और प्रभावशाली कमांडर थिप्पिरी तिरुपति उर्फ 'देवुजी' ने तेलंगाना पुलिस के समक्ष हथियार डाल दिए हैं. उनके साथ मल्ला राजी रेड्डी उर्फ संग्राम और कई अन्य कैडरों का आत्मसमर्पण सुरक्षा बलों के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि मानी जा रही है. शर्मा के अनुसार, यह राष्ट्रीय स्तर पर वामपंथी उग्रवाद के सफाए की दिशा में एक बहुत बड़ी जीत है.
तेलंगाना के जगतियाल जिले का निवासी देवुजी लगभग साठ वर्ष का है और पिछले कई दशकों से अबुझमाड़ और गढ़चिरौली के अभेद्य जंगलों में सक्रिय था. वह CPI (माओइस्ट) का मुख्य रणनीतिकार और पीपुल्स लिबरेशन गोरिल्ला आर्मी (PLGA) का संस्थापक सदस्य रहा है. मई 2025 में बसवराजू की मृत्यु के बाद उसे संगठन का महासचिव बनाया गया था. संगठन की केंद्रीय समिति और पोलितब्यूरो के सदस्य रहे देवुजी पर सरकार ने एक करोड़ रुपये का इनाम घोषित कर रखा था.
उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने इस सफलता का श्रेय केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की 'राष्ट्रीय रणनीति' और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को दी गई 'ऑपरेशनल फ्रीडम' को दिया है. दिल्ली पुलिस के एक कार्यक्रम में अमित शाह ने स्पष्ट रूप से कहा कि नक्सल हिंसा अपनी अंतिम सांसें गिन रही है. उन्होंने भरोसा जताया कि 31 मार्च 2026 तक भारत से नक्सलवाद पूरी तरह समाप्त हो जाएगा. उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के पिछले 12 वर्षों के कार्यकाल को आंतरिक सुरक्षा का 'स्वर्णिम काल' करार दिया.
गृह मंत्रालय द्वारा संसद में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, 2010 की तुलना में नक्सल हिंसा में 88% की भारी गिरावट दर्ज की गई है. 2018 में जहां 126 जिले नक्सल प्रभावित थे, दिसंबर 2025 तक उनकी संख्या घटकर केवल 8 रह गई है. साल 2025 में ही सुरक्षा बलों ने 364 नक्सलियों को ढेर किया और 2,337 का आत्मसमर्पण कराया. सरकार अब सरेंडर करने वाले नक्सलियों के लिए बेहतर पुनर्वास योजनाएं और प्रभावित क्षेत्रों में सड़क, शिक्षा व बैंकिंग सुविधाओं का जाल बिछा रही है, ताकि विकास के माध्यम से इस समस्या को जड़ से मिटाया जा सके.