कश्मीरी लड़के का छत्तीसगढ़ में नायक जैसा स्वागत, 6 महीने पहले पहलगाम हमले में राज्य के एक परिवार की बचाई थी जान?
पहलगाम हमले में जहां 26 पर्यटकों ने जान गंवाई, वही नजाकत नाम के एक शख्स ने छत्तीसगढ़ के परिवार की जान बचाकर नजीर पेश की है. वही अब उनका छत्तीसगढ़ में जोरदार स्वागत हुआ है.
चिरमिरी: 22 अप्रैल को पहलगाम में आतंकियों ने नापाक वारदात को अंजाम देते हुए 26 पर्यटकों को मौत के घाट उतार दिया था. वही इस हमले में जीवित बचे एक शख्स ने उस मुस्लिम व्यक्ति की तारीफ की है, जिसने अपनी जान पर खेलकर 11 लोगों की जिंदगी बचाई.
दरअसल, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सदस्य और पहलगाम हमले में जीवित बचे अरविंद अग्रवाल ने नजाकर अहमद शाह की वीरता की प्रशंसा की है. नजाकत, जम्मू-कश्मीर के बैसरन के पास एक छोटे से गांव का ऊनी कपड़ा विक्रेता है, लेकिन उस दिन उसने जो किया, उसने उसे इंसानियत और बहादुरी का प्रतीक बना दिया.
'उसने हमारी जान बचाई, मैं उसका कर्ज कैसे चुका सकता हूं'
हमले में जीवित बचे अरविंद अग्रवाल आज भी उस दिन की याद से कांप उठते हैं. उन्होंने कहा कि जब गोलियां चलीं, मुझे लगा पटाखे फूट रहे हैं. लेकिन मेरी पत्नी पूजा ने कहा कि यह गोलीबारी है. हमने अपनी चार साल की बेटी समृद्धि की ओर दौड़ लगाई. तभी एक बुजुर्ग व्यक्ति को गोली लगी, और उसके खून के छींटे हमारी बेटी के जूतों पर पड़ गए.
अनिल ने कहा कि घबराहट के बीच जब आतंकियों ने हमला तेज कर दिया, तब नजाकत ने अरविंद की पत्नी और बेटी को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के लिए अपनी जान दांव पर लगा दी. उसने बच्ची को अपनी बेटी बताकर गोलियों की बौछार के बीच उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला.
क्या कहा नजाकत ने?
वही नजाकत ने कहा कि सब कुछ बहुत तेजी से हुआ. मैंने देखा कि मेरे दोस्तों की पत्नियां और बच्चे खुले में फंसे हैं. मैं बिना सोचे-समझे उनकी ओर भागा. उस वक्त बस यही दुआ थी कि कोई और घायल न हो.
हमले में नजाकत के चचेरे भाई सैयद आदिल हुसैन शाह की मौत हो गई. वो एक टट्टू ऑपरेटर थे और 22 अप्रैल के नरसंहार के 26 पीड़ितों में एकमात्र मुस्लिम थे. बावजूद इसके, नजाकत अपने घायल दोस्तों के साथ तीन दिन तक रहा, उनके लिए खाना, दवाइयां और कपड़े जुटाता रहा.
स्थानीय लोगों के लिए रोल मॉडल बने नजाकत
छत्तीसगढ़ चिरमिरी लौटने के बाद नजाकत का स्वागत फूल-मालाओं, पटाखों और गर्मजोशी भरे आलिंगन से किया गया. शहर के लोगों ने उसके सम्मान में समारोह आयोजित किए.
वही नजाकत को सम्मान देने पर अरविंद ने भावुक होकर कहा कि कुछ लोग मुझसे पूछते हैं कि मैं उसे इतना बढ़ावा क्यों दे रहा हूं, इससे मेरा राजनीतिक करियर प्रभावित होगा. लेकिन उसने हमारी जान बचाई है. मैं उसका कर्ज कैसे चुका सकता हूं?
चार दशक से चली आ रही दोस्ती
नजाकत का परिवार 35 सालों से हर सर्दी, छत्तीसगढ़ के चिरमिरी में ऊनी कपड़े बेचता है. अरविंद और नजाकत की दोस्ती बचपन से चली आ रही है.
वही नजाकत ने कहा कि मैं पिछले चार साल से अरविंद और उसके परिवार को कश्मीर आने के लिए कह रहा था. इस साल वे आए, और मैंने खुद जम्मू जाकर उन्हें रिसीव किया.
'सम्मान की उम्मीद'
अरविन्द ने कहा कि नजाकत ने जो किया, वह केवल दोस्ती नहीं बल्कि इंसानियत का सबक है. उन्होंने कहा कि मुझे उम्मीद है कि छत्तीसगढ़ सरकार उसे उसके साहस और मानवता के लिए सम्मानित करेगी.