छत्तीसगढ़ में प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी की कार्रवाई से मंगलवार सुबह हलचल बढ़ गई. जांच एजेंसी की टीम ने राज्य में सात अलग-अलग ठिकानों पर तलाशी शुरू की. इनमें भिलाई स्थित केके चंद्राकर का घर भी शामिल है. चंद्राकर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निजी सहायक रह चुके हैं.
जानकारी के अनुसार, ईडी की टीम सुबह करीब छह बजे कई गाड़ियों से उनके आवास पर पहुंची. अचानक हुई इस कार्रवाई के बाद आसपास के इलाके में लोगों की आवाजाही बढ़ गई. सुरक्षा को देखते हुए घर के बाहर पुलिस बल भी तैनात किया गया.
तलाशी के दौरान ईडी के अधिकारी घर के अंदर दस्तावेजों और दूसरे जरूरी सामान की जांच कर रहे हैं. हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि एजेंसी की यह कार्रवाई किस मामले या जांच से जुड़ी हुई है. करीब 12 दिन पहले भी ईडी ने रायपुर, दुर्ग, भिलाई और धमतरी में शराब घोटाले से जुड़ी जांच के तहत कई जगहों पर दबिश दी थी. ऐसे में ताजा कार्रवाई को लेकर भी शराब घोटाले की जांच से जुड़े होने की चर्चा तेज हो गई है.
केके चंद्रवंशी के आवास पर हुई कार्रवाई के बाद पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से जुड़े पुराने मामलों की भी चर्चा शुरू हो गई है. पिछले कुछ वर्षों में ईडी की जांच बघेल के राजनीतिक और प्रशासनिक दायरे से जुड़े कई लोगों तक पहुंची है. वर्ष 2023 में ईडी ने तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के राजनीतिक सलाहकार विनोद वर्मा और उनके दो ओएसडी के परिसरों पर भी तलाशी ली थी. उस समय कार्रवाई को ऑनलाइन सट्टेबाजी और कथित धनशोधन से जुड़ी जांच के संदर्भ में बताया गया था.
शराब घोटाले से जुड़े कथित धनशोधन मामले में वर्ष 2025 में ईडी ने भिलाई स्थित भूपेश बघेल के आवास पर भी तलाशी ली थी. 18 जुलाई 2025 को हुई इस कार्रवाई के बाद एजेंसी ने उनके बेटे चैतन्य बघेल को गिरफ्तार किया था. ईडी के अनुसार, यह कार्रवाई कथित 2,100 करोड़ रुपये के शराब घोटाले से जुड़े धनशोधन मामले की जांच के तहत की गई थी. अब बघेल के पूर्व निजी सहायक के घर पर हुई ताजा कार्रवाई के बाद इस जांच के दायरे और आगे की कार्रवाई को लेकर सवाल उठने लगे हैं.