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India Daily

बॉलीवुड पर भड़के देवकीनंदन ठाकुर ने की कॉन्वेंट स्कूल बंद कर मॉडर्न गुरुकुल खोलने की वकालत; जानें वजह

रायपुर में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर ने कॉन्वेंट और इंग्लिश मीडियम स्कूलों की आलोचना करते हुए मॉडर्न गुरुकुल व्यवस्था लागू करने की वकालत की.

Km Jaya
Edited By: Km Jaya
बॉलीवुड पर भड़के देवकीनंदन ठाकुर ने की कॉन्वेंट स्कूल बंद कर मॉडर्न गुरुकुल खोलने की वकालत; जानें वजह
Courtesy: Pinterest

रायपुर: मशहूर कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर ने देश की शिक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ा बयान दिया है. छत्तीसगढ़ के रायपुर में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने इंग्लिश मीडियम और कॉन्वेंट स्कूलों की बढ़ती संख्या पर चिंता जताई. उन्होंने कहा कि देश में मॉडर्न गुरुकुल की व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए और कॉन्वेंट स्कूलों की जगह ऐसी शिक्षा दी जानी चाहिए जो भारतीय संस्कृति और संस्कारों पर आधारित हो.

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान देवकीनंदन ठाकुर ने स्कूलों में होने वाली सांस्कृतिक गतिविधियों पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि छोटी बच्चियों को बॉलीवुड के गानों पर नचाना उचित नहीं है. उनके अनुसार स्कूलों का उद्देश्य केवल पढ़ाई कराना नहीं बल्कि बच्चों के चरित्र का निर्माण करना भी होना चाहिए. उन्होंने कहा कि यदि शिक्षकों को ऐसे कार्यक्रम पसंद हैं तो वे अपने परिवार के बच्चों के साथ ऐसा करें, लेकिन स्कूलों में पढ़ने आने वाले बच्चों को अच्छे संस्कार दिए जाने चाहिए.

उन्होंने आगे क्या कहा?

उन्होंने कहा कि शिक्षक केवल रोजगार या धन कमाने की शिक्षा न दें, बल्कि विद्यार्थियों को चरित्रवान और जिम्मेदार नागरिक बनाने का प्रयास करें. उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में नैतिक मूल्यों और भारतीय परंपराओं को अधिक महत्व देने की आवश्यकता बताई.

देवकीनंदन ठाकुर ने मॉडर्न गुरुकुल की अवधारणा रखते हुए कहा कि वहां छात्राओं को भारतीय इतिहास और संस्कृति से जुड़ी महान महिलाओं जैसे महारानी लक्ष्मीबाई, मीराबाई, सती अनुसुइया, सावित्री और माता सीता के जीवन से प्रेरित गतिविधियां कराई जानी चाहिए. उनका मानना है कि इससे बच्चों में अच्छे संस्कार और नैतिक मूल्यों का विकास होगा.

वर्तमान शिक्षा व्यवस्था पर क्या बोले?

उन्होंने वर्तमान शिक्षा व्यवस्था को औपनिवेशिक सोच से प्रभावित बताते हुए कहा कि इसमें बदलाव की जरूरत है. उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति पर आधारित आधुनिक शिक्षा प्रणाली विकसित की जानी चाहिए, जिससे नई पीढ़ी अपने संस्कारों और मूल्यों से जुड़ी रहे.

देवकीनंदन ठाकुर के इस बयान के बाद शिक्षा व्यवस्था, सांस्कृतिक गतिविधियों और भारतीय परंपराओं को लेकर नई बहस शुरू हो गई है. हालांकि यह उनके व्यक्तिगत विचार हैं और इस पर अलग-अलग वर्गों की अलग-अलग राय हो सकती है. फिलहाल उनके बयान को लेकर सोशल मीडिया और विभिन्न मंचों पर चर्चा तेज हो गई है.