पटना: बिहार की राजनीति में गुरुवार का दिन इतिहास बन गया, जब नीतीश कुमार ने पटना के गांधी मैदान में 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली.
शपथ ग्रहण समारोह पूरी तरह भव्य और उत्साह से भरा रहा, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय मंत्रियों और हजारों लोगों की उपस्थिति ने इसे खास बना दिया. बिहार चुनाव में एनडीए को मिले प्रचंड बहुमत के बाद यह शपथ ग्रहण राज्य में नई राजनीतिक ऊर्जा और स्थिरता का संकेत माना जा रहा है.
सुबह 11:32 बजे ऐतिहासिक गांधी मैदान में राज्यपाल ने नीतीश कुमार को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई. जैसे ही शपथ पूरी हुई, प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें मंच पर ही बधाई दी. नीतीश कुमार ने भी मुस्कुराते हुए उनका हाथ पकड़कर अभिवादन स्वीकार किया. जनता और नेताओं की जोरदार तालियों के बीच यह पल बिहार की सियासत का प्रतीकात्मक क्षण बन गया. एनडीए को मिली 202 सीटों की जीत के बाद यह शपथ ग्रहण राज्य में मजबूती से सरकार गठन की पुष्टि करता है.
नीतीश कुमार के बाद सम्राट चौधरी ने ईश्वर के नाम पर मंत्री पद की शपथ ली. वे ओबीसी कुशवाहा समुदाय से आते हैं और पार्टी के बड़े चेहरे माने जाते हैं. उनके बाद विजय कुमार सिन्हा ने शपथ ली, जिन्हें एक बार फिर डिप्टी सीएम बनाया गया है. भूमिहार समुदाय से आने वाले विजय सिन्हा अपनी मजबूत संगठनात्मक पकड़ और आरएसएस से निकटता के लिए जाने जाते हैं. लखीसराय की कांटे की लड़ाई में उनकी जीत ने उनके लिए रास्ता और मजबूत किया.
बीते दिनों यह चर्चाएं तेज थीं कि इस बार डिप्टी सीएम पद पर किसी नए चेहरे को मौका मिल सकता है. लेकिन विजय सिन्हा की लोकप्रियता, उनकी जीत और संगठन में पकड़ को देखते हुए पार्टी ने एक बार फिर उन पर भरोसा जताया. विधानसभा चुनाव में लखीसराय सीट बचाने के बाद उन्होंने दिखा दिया कि भूमिहार समाज में उनकी मजबूत पकड़ अभी भी कायम है. शपथ ग्रहण में उनका आत्मविश्वास साफ नजर आया.
शपथ ग्रहण समारोह में नीतीश कुमार की पुरानी सरकार के कई वरिष्ठ चेहरे एक बार फिर कैबिनेट में शामिल हुए. विजय कुमार चौधरी, बृजेंद्र प्रसाद यादव, श्रवण कुमार, मंगल पांडेय और दिलीप जायसवाल ने भी मंत्री पद की शपथ ली. अधिकांश पुराने मंत्रियों का पद बरकरार रहना यह संकेत देता है कि सरकार अनुभव और स्थिरता पर जोर देना चाहती है. लोगों के बीच इस फैसले को सकारात्मक संदेश के रूप में देखा जा रहा है.