किसान का बेटा, जूनियर इंजीनियर, 2016 में LED घोटाले में आया नाम... जानें कौन है NEET मामले का मास्टरमाइंड सिकंदर

Mastermind Sikander Yadvendu: NEET मामले का मास्टरमाइंड जूनियर इंजीनियर सिकंदर यादवेंदु किसान का बेटा है. बिहार में 2016 में हुए एलईडी घोटाले में भी सिकंदर का नाम सामने आया था. पटना के दानापुर के रूपसपुर इलाके में एक अपार्टमेंट में किराए के फ्लैट में रहने वाले यादवेंदु के पास इंजीनियरिंग की डिप्लोमा है. सिकंदर डेढ़ दशक तक ठेकेदार के रूप में काम कर चुका है.

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Mastermind Sikander Yadvendu: किसान परिवार से आने वाले और 2012 तक छोटे-मोटे ठेकेदार के तौर पर काम करने वाले 56 साल के सिकंदर पी यादवेंदु (56) को NEET पेपर लीक का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है. बिहार के पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यादवेंदु पेपर लीक मामले में मुख्य आरोपी है. उसे 5 मई को परीक्षा के कुछ घंटों बाद ही गिरफ्तार कर लिया गया था, उसके साथ 12 अन्य लोगों को भी गिरफ्तार किया गया था, जिनमें पेपर देने वाले चार अभ्यर्थी भी शामिल थे.

सिकंदर के पिता किसान थे. उसके परिवार के पास समस्तीपुर में आठ बीघा किसानी वाली जमीन है. 1980 के दशक में 10वीं पास करने के बाद सिकंदर रांची चला गया था, जहां उसने 12वीं कक्षा तक पढ़ाई की और डिप्लोमा किया. 2012 में जब बिहार में NDA की सरकार थी, तब सिकंदर को जल संसाधन विभाग में जूनियर इंजीनियर की नौकरी मिल गई.

2016 में यादवेंदु का नाम रोहतास नगर परिषद में 2.92 करोड़ रुपये के एलईडी घोटाले में आया था, जिसका अतिरिक्त प्रभार भी उसके पास था. आरोपों में डालमियानगर में लगाए जाने वाले एलईडी को बढ़ी हुई दरों पर खरीदना शामिल था. उसे उस वक्त भी गिरफ्तार किया गया था लेकिन बाद में जमानत पर रिहा कर दिया गया.

2021 में कॉन्टैक्ट का यूज कर कराया अपना तबादला

 2021 में सिकंदर ने अपने कॉन्टैक्ट्स का यूज कर शहरी विकास और आवास विभाग में अपना तबादला करवा लिया और दानापुर नगर परिषद में पोस्टिंग करवा ली. सूत्रों ने बताया कि उसका वहां प्रभाव था और वो इलाके में बनने वाले अपार्टमेंट के लेआउट को मंजूरी देता था. दानापुर नगर परिषद के एक सूत्र ने कहा कि 2023 में उसका कुछ सीनियर्स के साथ झगड़ा हो गया और उसे जल संसाधन विभाग में ट्रांसफर कर दिया गया, लेकिन उसने अपने सोर्स का यूज कर ट्रांसफर के आदेश को पलटवा दिया.

अब बिहार में सत्ता में काबिज भाजपा ने आरोप लगाया है कि यादवेंदु का पूर्व उपमुख्यमंत्री और अब राज्य के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव के निजी सहायक प्रीतम कुमार से करीबी संबंध था. तेजस्वी ने शुक्रवार को कहा कि मामले की जांच कर रही बिहार पुलिस की आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने ऐसा कोई आरोप नहीं लगाया है और भाजपा इस मामले का राजनीतिकरण करने की कोशिश कर रही है.

सिकंदर की निशानदेही पर पकड़े गए थे चार अभ्यर्थी

5 मई को पटना एयरपोर्ट के पास NHAI के निरीक्षण बंगले से गिरफ्तार किए गए चार NEET अभ्यर्थियों को यादवेंदु की ओर से पुलिस को उनके ठिकाने का पता बताए जाने के बाद पकड़ा गया था. प्रीतम ने कथित तौर पर एक कर्मचारी को बुलाकर एक दिन पहले ही यादवेंदु के लिए कमरा बुक कर लिया था. चार अभ्यर्थियों में से एक यादवेंदु का रिश्तेदार है. उसने पुलिस को बताया कि यादवेंदु ने उसे आश्वासन दिया था कि परीक्षा से पहले क्वेश्चन पेपर उपलब्ध करा दिया जाएगा.

पुलिस के अनुसार, एक अन्य मुख्य आरोपी नीतीश कुमार 'पेपर सॉल्वर गैंग' का हिस्सा है. उसने पुलिस को बताया कि यादवेंदु ने ही चारों अभ्यर्थियों को गैंग से मिलाया था. गिरोह ने यादवेंदु से कहा था कि प्रत्येक छात्र के लिए 30-32 लाख रुपए लगेंगे, लेकिन उसने कथित तौर पर प्रत्येक छात्र से 40 लाख रुपए मांगे, जिनमें से दो उसके रिश्तेदार थे. चारों को आखिरकार 720 में से 581, 483, 300 और 185 अंक मिले.

एक अधिकारी ने बताया कि यादवेंदु अंतरराज्यीय गिरोह का एक सदस्य है. सिकंदर और गिरफ्तार किए गए 4 सदस्यों ने दो दर्जन से अधिक छात्रों से संपर्क किया था. पुलिस अधिकारी ने बताया कि हमने 9 और परीक्षार्थियों की पहचान की है और उनसे पूछताछ कर रहे हैं. हम गिरोह के सरगनाओं तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं, जो बिहार में आयोजित अन्य परीक्षाओं में कथित पेपर लीक में भी शामिल हैं.