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सेफ हाउस, रोल नंबर 13.. NEET पेपर लीक केस में 'भानुमति के पिटारे' तक ऐसे पहुंची पटना पुलिस

NEET Paper Leak : नीट पेपर लीक कांड अभी तक चर्चा में बना हुआ है. पूरे मामले की जांच जारी है.अब इस मामले में हर दिन एक नया खुलासा हो रहा है. जांच का मुख्य और अहम केंद्र बिंदु बिहार माना जा रहा है क्योंकि पेपर लीक की खबर भी यहां से ही फैली थी और अब बिहार पुलिस के लिए ये एक बहुत बड़ा चैलेंज साबित हो रहा है.

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Courtesy: Social Media

नीट पेपर लीक मामले में रोजाना नए खुलासे सामने आ रहे हैं. पेपर लीक मामले में बिहार पुलिस की आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने कई लोगों को अब तक गिरफ्तार किया है. जिनसे पूछताछ जारी है. इन आरोपियों ने  कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं. इस पेपर लीक कांड में पटना जेल भेजे गए अभ्यार्थी ने कुबूल किया है कि उन्हें नीट परीक्षा से चार घंटे पहले प्रश्नपत्र और उसका उत्तर मिल गया था. इसके बाद इसका प्रिंट आउट किया गया और पांच मई की सुबह तक इन्हें रटाना गया. 

पटना के शास्त्री नगर पुलिस स्टेशन की टीम ने इस मामले में चार संदिग्ध को पकड़ा. जिन्होंने 30 NEET-UG उम्मीदवारों को एक बैठक स्थल पर ले गए. जिन्होंने कथित तौर पर लीक हुए प्रश्नों और उत्तरों के लिए 30-50 लाख रूपये तक का भुकतान किया था. पुलिस के मुताबिक ये सभी ग्रुप में एकठ्टा होकर शहर के बाहरी इलाके के राम कृष्ण नगर में तय स्थान पर मिले उसके बाद सभी अभियार्थियों ने एक साथ उत्तर याद किया.

 

पटना बना पेपर लीक का अड्डा?


सूत्रों के मुताबिक पुलिस ने अभी तक एक दर्जनों से ज्यादा मेडिकल उम्मीदवारों और उनके हैंडलर को नाम पता लगाया है जो इस मामले में शामिल हैं. वहीं बिहार आर्थिक अपराध इकाई के एक शीर्ष सूत्र ने कहा,'यह पूरे राज्यों में फैला एक गहरा नेटवर्क है, हमें सभी अपराधियों पर लगाम कसने के लिए थोड़ा समय चाहिए'.


पटना में गिरफ्तार किए गए चारों आरोपियों ने रात भर छात्रों को उत्तर याद कराने और उनके निर्धारित परीक्षा केंद्रों पर छोड़ने की जिम्मेदारी ली थी. शास्त्री नगर थाने के एसएचओ अमर कुमार ने कहा, 'सूचना सटीक निकली, बस हमें उम्मीद नहीं थी कि यह NEET-UG से जुड़ा मामला किसी भानुमती के पिटारे तक ले कर जाएगी. हमने इस मामले पर कड़ी मेहनत की और हर सुराग को एक साथ जोड़ा. परिणाम सबके सामने है. हालांकि अभी भी एक लंबा रास्ता तय करना है.'

कैसे हुआ खुलासा?

बता दें कि इस मामले में पहली गिरफ्तारी होने के बाद की गई छापेमारी के दौरान पुलिस को सेफ हाउस में रोल नंबर 13 से जुड़ा एक सबूत दिखा, जिसके बाद एक घंटे के भीतर कई टीमें नीट परीक्षा केंद्रों पर पहुंच गईं. इस दौरान पुलिस ने चार अभ्यार्थियों को उठाया और उनसे पूछताछ के बाद पुलिस को नौ और नाम मिले, जिनसें पटना दानापुर नगर परिषद में जूनियर इंजीनियर सिकंदर यादवेंदु का नाम भी शामिल था.

यादवेंदु ने कथित तौर पर 4 मई को अभ्यार्थियों को याद करने के लिए प्रश्नपत्र और उत्तर दिए थे. 6 मई को पुलिस ने यादवेंदु के फ्लैट से जले हुए प्रश्नपत्र बरामद किए. अगले दिन कुछ अभ्यर्थियों के माता-पिता सहित 13 लोगों को हिरासत में लिया गया. 11 मई को मामला EOU को सौंप दिया गया. यूनिट के डीआईजी मानवजीत सिंह ढिल्लों को पूरे जांच की जिम्मेदारी दी गई.

कोचिंग संस्थान के मालिकों पर पुलिस का एक्शन! 

पेपर लीक होने का शक तब और गहरा हो गया जब गिरफ्तार छात्रों में से एक दानापुर निवासी 19 वर्षीय यादवेंदु के भतीजे ने कबूल किया कि उसे परीक्षा से एक दिन पहले वही प्रश्न पत्र मिले जो परीक्षा केंद्र पर दिया गया था. सूत्रों के मुताबिक एक आरोपी पर शक होने के बाद पुलिस ने पटना स्थित सभी कोचिंग संस्थान के मालिकों, शिक्षकों और कुछ छात्रों को हिरासत में लिया है जो कथित तौर पर इस रैकेट में शामिल थे. वहीं दो अन्य आरोपी नीतीश कुमार और अमित आनंद ने लीक की बात कबूल की. 

इस पूरे मामले में पुलिस ने अब तक छापेमारी के दौरान आपत्तिजनक दस्तावेज, इलेक्ट्रानिक उपकरण और काफी भारी मात्रा में नकदी जब्त की है. पुलिस का कहना है कि अभी इस मामले के तह तक जाने के लिए उन्हें थोड़ा और वक्त चाहिए.