मुंबई में बदलेगा सियासत का 'पावर गेम'? NCP के दोनों गुटों के 4 पार्षद शिवसेना में हुए शामिल, बीएमसी में बढ़ा शिंदे का दबदबा!
बीएमसी में एकनाथ शिंदे की शिवसेना को NCP के दोनों गुटों से चार नए पार्षद मिले हैं. इससे उनकी संख्या 29 से बढ़कर 33 हो गई और महायुति की कुल ताकत 122 पहुंच गई. यह कदम शिंदे गुट की मुंबई में पकड़ मजबूत करेगा.
मुंबई की सियासत में एक बड़ा उलटफेर हुआ है. एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने बृहन्मुंबई महानगरपालिका में अपनी स्थिति को और मजबूत कर लिया है. सूत्रों की मानें तो NCP के अजित पवार गुट से तीन और शरद पवार गुट से एक पार्षद अब शिंदे शिवसेना में शामिल हो गए हैं. इस घटनाक्रम से महायुति गठबंधन की ताकत बढ़ गई है और ठाकरे परिवार का लंबे समय से चला आ रहा BMC पर नियंत्रण अब पूरी तरह कमजोर पड़ गया है. यह बदलाव आने वाले दिनों में प्रशासनिक फैसलों पर असर डालेगा.
चार नए पार्षदों का शामिल होना
NCP के दोनों गुटों से कुल चार नगरसेवक शिंदे शिवसेना में शामिल हुए हैं. अजित पवार गुट के तीन और शरद पवार गुट का एक पार्षद अब शिंदे गुट के साथ है. इनकी वजह से शिवसेना की संख्या 29 से बढ़कर 33 हो गई है. इस कदम से पार्टी ने एक संयुक्त विधायी दल बनाया है, जिसमें NCP के इन सदस्यों को जगह दी गई है.
महायुति की ताकत 122 पर पहुंची
चार नए सदस्यों के आने से महायुति गठबंधन की कुल संख्या 122 नगरसेवकों तक पहुंच गई है. मंगलवार को महायुति बीएमसी में दो अलग-अलग समूहों के रूप में खुद को पंजीकृत कराने वाली है. भाजपा अलग समूह बनेगी, जबकि शिवसेना (शिंदे) NCP के इन पार्षदों के साथ मिलकर संयुक्त दल के तौर पर रजिस्ट्रेशन करेगी. यह रणनीतिक कदम शिंदे गुट की स्थिति को मजबूत करने वाला माना जा रहा है.
महायुति के पक्ष में मुंबई का जनादेश
इस बार के BMC चुनाव में महायुति ने कमाल दिखाया. भाजपा 90 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी, जबकि शिवसेना (शिंदे) को 29 सीटें मिलीं. कुल मिलाकर महायुति को 118 सीटें हासिल हुईं. तीन दशकों से ज्यादा समय तक ठाकरे परिवार का दबदबा रहा, लेकिन इस चुनाव ने साफ कर दिया कि मुंबई का मूड अब बदल चुका है.
शिवसेना (UBT) को मिला झटका
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के लिए यह चुनाव बेहद निराशाजनक रहा. पार्टी को सिर्फ 65 सीटें मिलीं, जबकि 2017 में वह 84 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी थी. आठ साल में 19 सीटों का नुकसान हुआ है. यह नतीजे बदलते राजनीतिक समीकरणों और मतदाताओं की पसंद में आए बड़े बदलाव को दिखाते हैं.