Lalu Yadav Birthday: गांव की गलियों से सत्ता के शिखर तक, जानें लालू यादव ने कैसे पूरा किया सफर

आरजेडी के सुप्रीम लीडर लालू यादव आज अपना 79वां जन्मदिन मना रहे हैं. आज के इस खास दिन पर उनके जीवन से जुड़ी कुछ खास बातें जानेंगे.

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Shanu Sharma

पटना: लालू यादव का नाम बिहार की राजनीति में एक ऐसी पहचान है, जिसे शायद ही कोई नजरअंदाज कर सके. लालू यादव ने अपने जीवन में कई संघर्ष देखे और उन्हीं संघर्षों ने उन्हें जनता का नेता बनाया. बिहार की सामाजिक व्यवस्था, जातिगत भेदभाव और आर्थिक चुनौतियों के बीच उनका सफर शुरू हुआ. लालू यादव की कहानी केवल एक व्यक्ति की सफलता नहीं, बल्कि उस दौर के सामाजिक बदलाव की भी कहानी मानी जाती है.

बिहार के गोपालगंज जिले के फुलवरिया गांव में लालू यादव का बचपन बीता. उस समय गांवों में जाति व्यवस्था का गहरा प्रभाव था. समाज के अलग-अलग वर्गों के बीच स्पष्ट दूरी दिखाई देती थी. गांव की अधिकांश जमीन प्रभावशाली वर्गों के पास थी, जबकि गरीब और पिछड़े परिवार सीमित संसाधनों में जीवन बिताते थे.

लालू यादव का बचपन

परिवार के लोगों के अनुसार, लालू यादव बचपन से ही अलग सोच रखने वाले थे. एक घटना अक्सर सुनाई जाती है, जब वह अपने घर के आंगन में स्लेट पर चित्र बना रहे थे. उसी दौरान कुछ जमींदार वहां से गुजरे और उनकी पढ़ाई को लेकर तंज कसने लगे. इस घटना ने लालू यादव और उनके परिवार को झकझोर दिया और इसके बाद उन्हें आगे की पढ़ाई के लिए पटना भेजा गया.


पटना पहुंचने के बाद लालू यादव के जीवन में बड़ा बदलाव आया. उनके चाचा पशु चिकित्सा महाविद्यालय में काम करते थे. वहीं रहकर उन्होंने अपनी पढ़ाई आगे बढ़ाई. बाद में उन्होंने बी.एन. कॉलेज में दाखिला लिया, जहां से छात्र राजनीति में उनकी सक्रियता बढ़ने लगी. राजनीतिक जीवन की शुरुआत में उन्होंने समाजवादी विचारधारा से जुड़े नेताओं के साथ काम किया. धीरे-धीरे उनकी पहचान एक प्रभावशाली वक्ता और जननेता के रूप में बनने लगी. आम लोगों से जुड़ने की उनकी शैली ने उन्हें दूसरों से अलग पहचान दिलाई.

लोगों से जुड़ने की खास कला

लालू यादव की सबसे बड़ी ताकत उनकी बोलने की शैली मानी जाती रही है. राजनीतिक जानकारों का कहना है कि वह जटिल मुद्दों को भी आम लोगों की भाषा में समझाने की क्षमता रखते थे. यही कारण रहा कि गांव, किसान, युवा और पिछड़े वर्गों के बीच उनकी लोकप्रियता लगातार बढ़ती गई.

आज लालू यादव उन नेताओं में गिने जाते हैं जिन्हें पूरे देश में जाना जाता है. उनका राजनीतिक सफर इस बात का उदाहरण माना जाता है कि सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद कोई व्यक्ति अपने दम पर बड़ी पहचान बना सकता है. बिहार की राजनीति, सामाजिक न्याय, पिछड़ा वर्ग, छात्र राजनीति, जननेता और ग्रामीण समाज जैसे विषयों पर चर्चा होने पर उनका नाम आज भी प्रमुखता से लिया जाता है.