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बिहार में SIR ड्रॉफ्ट के 15 दिन हुए पूरे, 28 हजार से अधिक वोटरों ने किया दावा-आपत्ति, राजनीतिक दलों ने अब तक रखी चुप्पी

Bihar SIR Draft: बिहार SIR ड्रॉफ्ट के 15 दिन पूरे हो चुके हैं और इसको लेकर 28 हजार से अधिक वोयरों ने दावा-आपत्ति आवेदन किया है. हालांकि, किसी भी राजनीतिक पार्टी ने ऐसा नहीं किया है.

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Praveen Kumar Mishra

Bihar SIR Draft: बिहार में विधानसभा चुनाव 2025 की तैयारियों के बीच भारत निर्वाचन आयोग ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत ड्रॉफ्ट वोटर लिस्ट 1 अगस्त, 2025 को जारी की थी. इस ड्रॉफ्ट पर दावा और आपत्ति दर्ज कराने के लिए 15 दिन का समय पूरा हो चुका है. 

चुनाव आयोग के अनुसार ड्रॉफ्ट वोटर लिस्ट जारी होने के बाद 15 दिनों में कुल 28,370 दावे और आपत्तियां प्राप्त हुई हैं. इनमें से 857 का निपटारा हो चुका है. हैरानी की बात यह है कि इस अवधि में किसी भी राजनीतिक दल ने कोई दावा या आपत्ति दर्ज नहीं कराई. आयोग ने बताया कि 1.6 लाख से अधिक बूथ लेवल एजेंट्स (BLAs) होने के बावजूद, कोई भी राजनीतिक दल इस प्रक्रिया में शामिल नहीं हुआ. 

नए मतदाताओं का पंजीकरण

SIR प्रक्रिया के तहत 18 साल या उससे अधिक उम्र के नए मतदाताओं के लिए नामांकन का भी मौका दिया गया. इस दौरान कुल 1,03,703 फॉर्म प्राप्त हुए, जिनमें से 6 फॉर्म बूथ लेवल एजेंट्स के माध्यम से जमा किए गए. इन आवेदनों की जांच संबंधित निर्वाचन रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO) या सहायक निर्वाचन रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (AERO) द्वारा की जाएगी. नियमों के अनुसार, पात्र दस्तावेजों की जांच के बाद 7 दिनों में दावों और आपत्तियों का निपटारा किया जाएगा.

कोई नाम नहीं हटेगा बिना जांच के

चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि ड्रॉफ्ट वोटर लिस्ट से किसी भी मतदाता का नाम बिना उचित जांच के नहीं हटाया जाएगा. अगर किसी का नाम हटाने की जरूरत होगी, तो ERO या AERO द्वारा निष्पक्ष जांच की जाएगी और मतदाता को सुनवाई का मौका दिया जाएगा. इसके बाद ही कोई आदेश पारित होगा. 

सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप

बिहार में SIR प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों ने कई सवाल उठाए हैं. उनका दावा है कि इस प्रक्रिया में 65 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं. इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में भी सुनवाई चल रही है. कोर्ट ने 14 अगस्त, 2025 को चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि वह हटाए गए मतदाताओं की सूची जिला निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट पर प्रकाशित करे और नाम हटाने का कारण भी स्पष्ट करे. साथ ही, इसकी जानकारी अखबार, रेडियो, टीवी और सोशल मीडिया के माध्यम से व्यापक रूप से प्रसारित करने को कहा गया.