Bihar Assembly Election: बिहार में महागठबंधन के अंदर तनाव बढ़ता जा रहा है. अब कांग्रेस पार्टी भी इंटरनल परेशानियों का सामना कर रही हैं. कई कांग्रेस नेता खुलेआम पार्टी नेताओं कृष्णा अल्लावरु (राज्य प्रभारी) और राजेश राम (प्रदेश अध्यक्ष) पर गलत व्यवहार का आरोप लगा रहे हैं. उनका दावा है कि टिकट योग्यता के आधार पर नहीं, बल्कि पैसे लेकर बेचे गए हैं.
कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता और रिसर्च सेल के प्रमुख आनंद माधवन ने तो यहां तक कह दिया कि कांग्रेस अपकमिंग बिहार चुनाव में 10 से ज्यादा सीटें नहीं जीत पाएगी. उन्होंने विरोध में अपने पद से इस्तीफा भी दे दिया. गजानंद शाही, छत्रपति यादव और रंजन सिंह समेत कई अन्य नेता भी प्रेस कॉन्फ्रेंस में शामिल हुए और टिकट बंटवारे पर नाराजगी जताई.
सीट बंटवारे को लेकर एक बड़ा मुद्दा यह उठा कि छत्रपति यादव को खगड़िया से टिकट नहीं मिला, जहां से वो पहले जीत चुके थे. इसके बजाय, पार्टी ने चंदन यादव को टिकट दे दिया, जो पहले किसी दूसरी सीट से हार गए थे. माधवन ने कहा कि अगर किसी मौजूदा विधायक को दोबारा टिकट नहीं भी दिया जाता है, तो पार्टी को कम से कम उन्हें किसी दूसरी सीट से मौका तो देना चाहिए.
नेताओं ने राजेश राम, कृष्णा अल्लावरु और शकील अहमद खान पर भ्रष्टाचार और कांग्रेस व राहुल गांधी की छवि खराब करने का आरोप लगाया. इस बीच, महागठबंधन ने अभी तक सीटों के बंटवारे को अंतिम रूप नहीं दिया है, जबकि पहले फेज के लिए नामांकन दाखिल करने की समय सीमा 17 अक्टूबर को बीत चुकी है.
एक ही गठबंधन के उम्मीदवार एक-दूसरे के खिलाफ लड़ रहे हैं, जिससे वोटों का बंटवारा हो सकता है. इस मुकाबले में एनडीए को फायदा हो सकता है. मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार पर भी सहमति नहीं बन पाई है. आरजेडी तेजस्वी यादव को चाहता है, लेकिन कांग्रेस सहमत नहीं है. वहीं, वीआईपी के मुकेश सहनी उप-मुख्यमंत्री बनना चाहते थे.