भागलपुर: बुधवार को बरारी स्थित राजकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज में चल रहे बाढ़ राहत शिविर में एक अलग ही माहौल देखने को मिला. बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी जब वहां पहुंचे तो उन्होंने औपचारिकता छोड़कर स्थानीय अंगिका बोली में बातचीत शुरू कर दी. इससे शिविर में रह रहे बाढ़ पीड़ित परिवारों के चेहरे खिल उठे.
मुख्यमंत्री शिविर परिसर में प्रवेश करते ही सबसे पहले हाथ जोड़कर बुजुर्गों और अन्य नागरिकों को प्रणाम किया. इसके बाद उन्होंने अपनी मिट्टी की भाषा अंगिका में सीधा संवाद शुरू कर दिया. उन्होंने पास बैठी नन्हीं बच्चियों के सिर पर हाथ फेरते हुए पूछा- 'कौनो दिक्कत तो नय छै? मन लगै छै कि नैय? खाना-पीना ठीक से मिलै छै?' बच्चियों ने मुस्कुराते हुए शिविर की व्यवस्थाओं को ठीक बताया.
मुख्यमंत्री ने बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों के बीच बैठकर भोजन, पीने के पानी और स्वास्थ्य सुविधाओं की विस्तार से जानकारी ली. बुजुर्गों से भी उन्होंने पूछा कि उन्हें समय पर पौष्टिक भोजन मिल रहा है या नहीं. ज्यादातर लोगों ने प्रशासनिक प्रबंधों पर संतोष जताया. उन्होंने मौके पर मौजूद अधिकारियों को साफ निर्देश दिए कि शिविर में रह रहे हर व्यक्ति की चिकित्सा, सुरक्षा और अन्य सुविधाओं में कोई कमी न रहे.
इस दौरान बाढ़ प्रभावितों ने मुख्यमंत्री से बाढ़ की स्थायी समस्या के समाधान की मांग भी की. उन्होंने कहा कि हर साल बाढ़ आने से उनका जीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है. मुख्यमंत्री ने उनकी बातें ध्यान से सुनीं और अधिकारियों को उचित कार्रवाई के निर्देश दिए.
सम्राट चौधरी का यह दौरा सिर्फ औपचारिक नहीं रहा. स्थानीय भाषा में बात करके उन्होंने पीड़ितों के दिल तक पहुंचने की कोशिश की. शिविर में आत्मीय और भावुक माहौल बना रहा. लोग खुश नजर आए कि मुख्यमंत्री उनकी बोली में उनसे बात कर रहे हैं.